लव जिहाद पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की दो टूक: समाधान के लिए समाज को करना होगा सामूहिक प्रयास
- Lucky Kumar
- Jan 5
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक बार फिर समाज से जुड़े संवेदनशील मुद्दे लव जिहाद पर अपनी बात स्पष्ट शब्दों में रखी है। उन्होंने कहा कि समाज में आपसी सम्मान और विश्वास स्वाभाविक रूप से विकसित होना चाहिए, लेकिन इसके लिए परिवार, समाज और संगठनों की सक्रिय भूमिका बेहद जरूरी है।
मोहन भागवत ने लव जिहाद जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तीन अहम उपाय सुझाए, जिन्हें यदि गंभीरता से अपनाया जाए तो इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
परिवार में संवाद को बताया सबसे ज़रूरी
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि किसी भी सामाजिक समस्या की शुरुआत और समाधान दोनों का केंद्र परिवार होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि परिवारों में माता-पिता और बच्चों के बीच निरंतर संवाद होना चाहिए।आज के डिजिटल युग में युवा पीढ़ी कई तरह के प्रभावों में रहती है, ऐसे में परिवार की जिम्मेदारी है कि वह बच्चों से खुलकर बात करे, उनके मित्रों, विचारों और गतिविधियों को समझे। संवाद की कमी ही कई बार गलत फैसलों की वजह बनती है।
लड़कियों में सतर्कता और आत्मरक्षा की भावना
दूसरे महत्वपूर्ण कदम के रूप में मोहन भागवत ने कहा कि समाज को लड़कियों में सतर्कता, आत्मविश्वास और आत्मरक्षा की भावना विकसित करनी चाहिए।उन्होंने कहा कि बेटियों को केवल शारीरिक आत्मरक्षा ही नहीं, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त बनाना जरूरी है ताकि वे सही और गलत में फर्क कर सकें और किसी भी तरह के छल या दबाव में न आएं।
अपराधियों के खिलाफ सख्त और प्रभावी कार्रवाई
आरएसएस प्रमुख ने साफ शब्दों में कहा कि यदि कोई व्यक्ति धोखे, लालच या दबाव के जरिए इस तरह के अपराध करता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत कड़ी और प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए।उन्होंने कहा कि कानून का डर ही अपराधियों को रोकने में सबसे कारगर साबित होता है और इसमें किसी तरह की ढिलाई समाज के लिए नुकसानदेह हो सकती है।
सामाजिक संगठनों की भूमिका पर जोर
मोहन भागवत ने यह भी कहा कि केवल सरकार या कानून के भरोसे इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता।सामाजिक संगठनों, स्वयंसेवी संस्थाओं और जागरूक नागरिकों को ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहना होगा। समाज को एकजुट होकर सामूहिक प्रतिरोध करना होगा, तभी स्थायी समाधान संभव है।
सामूहिक जागरूकता से ही मिलेगा समाधान
अपने संबोधन में आरएसएस प्रमुख ने स्पष्ट किया कि समाज में किसी भी प्रकार के विभाजन या तनाव से बचने के लिए जागरूकता और आपसी सम्मान सबसे बड़ा हथियार है।उन्होंने कहा कि जब समाज खुद सजग होगा, परिवार मजबूत होंगे और कानून अपना काम ईमानदारी से करेगा, तभी इस तरह की समस्याओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
मोहन भागवत के इस बयान को सामाजिक चेतना और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखा जा रहा है।




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