क्या कांग्रेस का दामन थामेंगे प्रशांत किशोर? प्रियंका गांधी से मुलाकात ने बढ़ाई राजनीतिक सरगर्मी
- Sonu Yadav
- Dec 15, 2025
- 2 min read

जनसूराज पार्टी के सूत्रधार और देश के जाने-माने चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर एक बार फिर सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि क्या प्रशांत किशोर अब कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं? अगर ऐसा होता है, तो इसे भारतीय राजनीति में एक बड़े और अप्रत्याशित बदलाव के रूप में देखा जाएगा। हाल ही में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी से हुई उनकी मुलाकात ने इन अटकलों को और मजबूत कर दिया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मुलाकात सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं आगे की हो सकती है। इसके समय, स्थान और राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखते हुए इसे बेहद अहम माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति, आगामी चुनावों और संभावित रणनीतियों को लेकर चर्चा हुई हो सकती है। हालांकि, इन चर्चाओं को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
खास बात यह है कि प्रशांत किशोर लंबे समय तक कांग्रेस की नीतियों, संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व को लेकर खुलकर आलोचना करते रहे हैं। वे कई मंचों पर कांग्रेस के भीतर सुधारों की जरूरत पर जोर देते नजर आए हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी से उनकी मुलाकात को कांग्रेस और प्रशांत किशोर—दोनों के लिए एक संभावित नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रशांत किशोर की पहचान एक ऐसे रणनीतिकार के रूप में रही है, जिन्होंने अलग-अलग दलों को चुनावी सफलता दिलाने में अहम भूमिका निभाई है। बाद में उन्होंने जनसूराज अभियान और फिर पार्टी के जरिए अपनी स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने की कोशिश की। अब अगर उनका झुकाव कांग्रेस की ओर होता है, तो इससे न सिर्फ पार्टी की चुनावी रणनीति बल्कि संगठनात्मक ढांचे पर भी असर पड़ सकता है।
कांग्रेस के भीतर भी इस मुलाकात को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कुछ नेताओं का मानना है कि प्रशांत किशोर जैसे अनुभवी रणनीतिकार की एंट्री से पार्टी को नई ऊर्जा और दिशा मिल सकती है, जबकि कुछ इसे राजनीतिक प्रयोग के तौर पर देख रहे हैं। फिलहाल, न तो प्रशांत किशोर और न ही कांग्रेस नेतृत्व की ओर से किसी तरह का आधिकारिक बयान सामने आया है।
फिलहाल इतना तय है कि प्रियंका गांधी से हुई यह मुलाकात राजनीतिक गलियारों में उत्सुकता और अटकलों का बड़ा कारण बन गई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह मुलाकात सिर्फ एक संवाद थी या फिर भारतीय राजनीति में किसी बड़े फैसले और नए समीकरण की भूमिका।




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