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हरिद्वार–ऋषिकेश के गंगा घाटों को लेकर विश्व हिंदू परिषद की मांग: गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध और धार्मिक मर्यादा की रक्षा का मुद्दा

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • 21 hours ago
  • 3 min read


उत्तराखंड में हरिद्वार और ऋषिकेश जैसे पवित्र धार्मिक स्थलों की मर्यादा और सनातन परंपराओं की रक्षा को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। विश्व हिंदू परिषद (VHP), उत्तराखंड इकाई ने राज्य सरकार और प्रशासन से सख्त कदम उठाने की मांग करते हुए कहा है कि गंगा घाटों और कुंभ मेला क्षेत्र की धार्मिक पवित्रता बनाए रखने के लिए ठोस नीतिगत फैसले जरूरी हैं।


विश्व हिंदू परिषद का कहना है कि हरिद्वार और ऋषिकेश केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की आस्था के केंद्र हैं, जहां सदियों से चली आ रही परंपराओं और नियमों का पालन होना चाहिए।


क्या है विश्व हिंदू परिषद की मुख्य मांग?


VHP ने उत्तराखंड सरकार से मांग की है कि:


  • हरिद्वार और ऋषिकेश के पवित्र गंगा घाटों

  • कुंभ मेला क्षेत्र


में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया जाए। परिषद का तर्क है कि यह कदम किसी समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि धार्मिक मर्यादा और परंपराओं की रक्षा के लिए आवश्यक है।


1916 और 1953 की नियमावली का हवाला


विश्व हिंदू परिषद ने अपनी मांग के समर्थन में 1916 और 1953 की पुरानी नियमावलियों का हवाला दिया है। परिषद के अनुसार, इन नियमों में पवित्र घाटों और धार्मिक क्षेत्रों की विशेष पहचान और आचरण को लेकर स्पष्ट प्रावधान थे, जिनका उद्देश्य आस्था स्थलों की गरिमा बनाए रखना था।

VHP का कहना है कि समय के साथ इन नियमों का पालन कमजोर पड़ा है, जिससे धार्मिक स्थलों पर अनुशासन और मर्यादा प्रभावित हो रही है।


मांस-मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग


परिषद ने केवल प्रवेश प्रतिबंध तक ही अपनी मांग सीमित नहीं रखी। उन्होंने हरिद्वार, ऋषिकेश और कुंभ मेला क्षेत्र में:

  • मांस और मदिरा पर पूर्ण प्रतिबंध

  • खुलेआम बिक्री और सेवन पर सख्त कार्रवाई

  • धार्मिक क्षेत्रों में नियमों का कड़ाई से पालन

की भी मांग की है।


VHP का कहना है कि इन स्थानों पर मांस-मदिरा का सेवन न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता है, बल्कि इन पवित्र स्थलों की आध्यात्मिक पहचान को भी नुकसान पहुंचाता है।


सभी घाटों पर समान व्यवस्था लागू करने की अपील


विश्व हिंदू परिषद ने यह भी मांग की है कि:


  • हरिद्वार और ऋषिकेश के सभी गंगा घाटों पर एक समान नियम लागू हों

  • किसी एक घाट पर सख्ती और दूसरे पर ढील न दी जाए

  • प्रशासनिक स्तर पर स्पष्ट गाइडलाइंस जारी की जाएं

परिषद के अनुसार, नियमों में असमानता से भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा होती है।


परिषद का तर्क: आस्था बनाम अव्यवस्था


VHP नेताओं का कहना है कि:


  • गंगा घाट केवल स्नान स्थल नहीं, बल्कि पूजा, तपस्या और साधना के केंद्र हैं

  • बढ़ते पर्यटन और व्यावसायिक गतिविधियों के कारण धार्मिक मर्यादा प्रभावित हो रही है

  • कुंभ जैसे आयोजनों की वैश्विक पहचान को बनाए रखने के लिए सख्त नियम जरूरी हैं


उनका दावा है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में इन स्थलों की मूल धार्मिक पहचान कमजोर पड़ सकती है।


प्रशासन और सरकार की भूमिका पर सवाल


विश्व हिंदू परिषद ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति और निर्णय लेने की मांग की है। परिषद का कहना है कि अभी तक नियमों को लेकर स्थिति अस्पष्ट है, जिसका फायदा अराजक तत्व उठा रहे हैं।


हालांकि, इस मांग पर सरकार या प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


सामाजिक और कानूनी बहस की संभावना


विशेषज्ञों का मानना है कि VHP की यह मांग:


  • धार्मिक आस्था

  • संवैधानिक अधिकार

  • पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था


जैसे मुद्दों को लेकर व्यापक बहस को जन्म दे सकती है। आने वाले दिनों में यह मामला राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और चर्चा में रह सकता है।


हरिद्वार और ऋषिकेश के गंगा घाटों तथा कुंभ मेला क्षेत्र को लेकर विश्व हिंदू परिषद की मांग ने एक बार फिर धार्मिक मर्यादा और प्रशासनिक जिम्मेदारी के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। अब यह देखना अहम होगा कि उत्तराखंड सरकार इस मांग पर क्या रुख अपनाती है और क्या कोई नई नीति या दिशा-निर्देश सामने आते हैं।


फिलहाल, यह मुद्दा आस्था, परंपरा और आधुनिक प्रशासन के बीच संतुलन की चुनौती को उजागर करता है।

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