चुनावी हार पर अमित शाह का राहुल गांधी पर तीखा हमला, बोले—हर बात का विरोध करेंगे तो जनता वोट क्यों देगी?
- Lucky Kumar
- Dec 29, 2025
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केंद्रीय गृह मंत्री और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता अमित शाह ने कांग्रेस पार्टी की हालिया चुनावी हार को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने कहा कि जो राजनीतिक दल जनता को पसंद आने वाली हर नीति और फैसले का विरोध करता है, उसे चुनावों में समर्थन मिलना स्वाभाविक रूप से मुश्किल हो जाता है।
अमित शाह ने कटाक्ष करते हुए कहा कि यह सरल राजनीतिक तर्क राहुल गांधी की समझ से परे है, यही कारण है कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता भी उन्हें यह बात समझाने में असफल रहे हैं।
“विरोध की राजनीति कांग्रेस को ले डूबी” – अमित शाह
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने बीते वर्षों में केवल विरोध की राजनीति को ही अपना एजेंडा बनाया है। चाहे वह विकास परियोजनाएं, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसले, या जनकल्याणकारी योजनाएं हों—कांग्रेस ने हर मुद्दे पर सरकार का विरोध किया।
उन्होंने कहा,“अगर कोई पार्टी हर उस चीज़ का विरोध करे जिसे जनता पसंद करती है, तो जनता उसे वोट क्यों देगी?”
राहुल गांधी पर तंज, बोले—हार से थकना नहीं चाहिए
गृह मंत्री ने चुटकी लेते हुए कहा कि राहुल गांधी को चुनावी हार से थकना नहीं चाहिए, क्योंकि कांग्रेस पार्टी को आगे भी कई चुनावी पराजयों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने दावा किया कि आगामी तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भी कांग्रेस को हार का सामना करना तय है।
अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस को अपनी नीतियों और नेतृत्व पर आत्ममंथन करने की जरूरत है, लेकिन पार्टी बार-बार जनता के फैसले को नकारते हुए बहाने तलाशती रहती है।
2029 लोकसभा चुनाव पर भी बड़ा दावा
अमित शाह ने केवल मौजूदा हालात पर ही नहीं, बल्कि भविष्य की राजनीति पर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा 2029 के लोकसभा चुनावों में भी विजय हासिल करेगी।
उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार की नीतियां, विकास कार्य, राष्ट्रीय सुरक्षा और गरीब कल्याण की योजनाएं जनता के बीच भरोसा पैदा कर रही हैं, और यही कारण है कि भाजपा को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है।
भाजपा बनाम कांग्रेस: वैचारिक लड़ाई
विशेषज्ञों के अनुसार, अमित शाह का यह बयान आगामी चुनावों से पहले भाजपा की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। भाजपा जहां विकास और स्थिर नेतृत्व को अपना मुख्य मुद्दा बता रही है, वहीं कांग्रेस अब भी संगठनात्मक कमजोरी और नेतृत्व संकट से जूझती नजर आ रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस को अगर भविष्य में खुद को मजबूत करना है, तो उसे केवल विरोध नहीं बल्कि वैकल्पिक नीतियों और ठोस दृष्टिकोण के साथ जनता के सामने आना होगा।
अमित शाह के इस बयान ने एक बार फिर देश की राजनीति में तीखी बयानबाज़ी को हवा दे दी है। जहां भाजपा आत्मविश्वास के साथ आगामी चुनावों की तैयारी में जुटी है, वहीं कांग्रेस के लिए यह बयान आत्ममंथन का अवसर भी बन सकता है। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि जनता किसे भरोसेमंद विकल्प मानती है।




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