लैंड फॉर जॉब घोटाला: लालू प्रसाद यादव परिवार को बड़ा झटका, राउस एवेन्यू कोर्ट ने 40 से ज्यादा आरोपियों पर तय किए आरोप
- Lucky Kumar
- 23 hours ago
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लैंड फॉर जॉब घोटाले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख और पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउस एवेन्यू कोर्ट ने इस बहुचर्चित मामले में लालू यादव समेत 40 से अधिक आरोपियों के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं।
सीबीआई की विशेष अदालत ने सभी पक्षों की लंबी दलीलें सुनने के बाद यह अहम फैसला सुनाया।
इस फैसले को न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मामला सीधे लालू यादव के रेल मंत्री रहते हुए लिए गए फैसलों से जुड़ा है।
क्या है लैंड फॉर जॉब घोटाला?
सीबीआई के मुताबिक, यह मामला 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि इस दौरान रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरियों के बदले उम्मीदवारों या उनके परिजनों से जमीन या फ्लैट ट्रांसफर कराए गए।
जांच एजेंसी का दावा है कि:
नौकरी पाने वाले उम्मीदवारों से बाजार कीमत से बेहद कम दाम पर संपत्तियां ली गईं
ये संपत्तियां लालू यादव के परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम ट्रांसफर की गईं
नियुक्तियों की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई
किन-किन पर तय हुए आरोप?
राउस एवेन्यू कोर्ट द्वारा जिन लोगों पर आरोप तय किए गए हैं, उनमें शामिल हैं:
लालू प्रसाद यादव
उनकी पत्नी राबड़ी देवी
बेटे तेजस्वी यादव (कुछ मामलों में अलग चरण में)
बेटियां मीसा भारती, हेमा यादव
परिवार से जुड़ी कंपनियां और ट्रस्टी
रेलवे के पूर्व अधिकारी और कथित लाभार्थी
कुल मिलाकर 40 से अधिक आरोपी इस केस में अब ट्रायल का सामना करेंगे।
अदालत का क्या कहना है?
सीबीआई की विशेष अदालत ने कहा कि:
प्रथम दृष्टया आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद हैं
यह मामला विस्तृत ट्रायल की मांग करता है
आरोप तय करने के स्तर पर बचाव पक्ष की दलीलों से आरोप खारिज नहीं किए जा सकते
अदालत के इस फैसले के बाद अब मामले में गवाहों की पेशी और नियमित सुनवाई शुरू होगी।
सीबीआई के आरोप क्या हैं?
सीबीआई का कहना है कि:
रेलवे में नौकरियों के बदले रिश्वत के रूप में जमीन ली गई
जमीन और फ्लैट्स को लालू परिवार की संपत्ति में जोड़ा गया
पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित साजिश के तहत की गई
जांच एजेंसी ने इसे भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का स्पष्ट मामला बताया है।
लालू परिवार का पक्ष
लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार ने शुरू से ही इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया है। उनका कहना है कि:
सभी संपत्ति सौदे कानूनी और वैध हैं
नियुक्तियां नियमों के तहत हुईं
विपक्ष और केंद्र सरकार एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है
राजद नेताओं का यह भी दावा है कि चुनावी माहौल में इस तरह की कार्रवाई विपक्ष को कमजोर करने की कोशिश है।
बिहार की राजनीति पर असर
इस फैसले के बाद बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इसे न्यायिक प्रक्रिया की जीत बताया है, जबकि राजद इसे राजनीतिक बदले की कार्रवाई बता रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि:
आने वाले चुनावों में यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक हथियार बन सकता है
तेजस्वी यादव की छवि पर भी इसका असर पड़ सकता है
राजद को कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर चुनौती मिलेगी
आगे क्या?
अब इस मामले में:
नियमित ट्रायल शुरू होगा
सीबीआई गवाहों और दस्तावेजों को पेश करेगी
आरोप सिद्ध होते हैं तो आरोपियों को कठोर सजा का सामना करना पड़ सकता है
यह मामला अभी लंबा चलने वाला है और इसके राजनीतिक नतीजे भी दूरगामी हो सकते हैं।
लैंड फॉर जॉब घोटाले में आरोप तय होना लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के लिए एक बड़ा कानूनी झटका है। हालांकि अंतिम फैसला ट्रायल के बाद ही आएगा, लेकिन फिलहाल यह मामला एक बार फिर बिहार की राजनीति के केंद्र में आ गया है।
अब सबकी नजरें अदालत की अगली सुनवाई और इस केस के भविष्य पर टिकी हैं।




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