top of page

डोनाल्ड ट्रंप का बयान: पीएम मोदी से रिश्ते अच्छे, लेकिन रूसी तेल पर टैरिफ से नाराज़ है भारत

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • 2 days ago
  • 2 min read



ट्रंप बोले— दोस्ती बरकरार, मगर व्यापारिक फैसलों से बढ़ी असहजता


अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने संबंधों को लेकर खुलकर बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि उनके और प्रधानमंत्री मोदी के बीच व्यक्तिगत और कूटनीतिक रिश्ते अच्छे हैं, लेकिन रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ से पीएम मोदी खुश नहीं हैं।


यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट, रूस-यूक्रेन युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंध लगातार चर्चा में बने हुए हैं।


“मोदी मेरे दोस्त हैं, लेकिन…” — ट्रंप का साफ संदेश


एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा,


“प्रधानमंत्री मोदी और मेरे बीच अच्छे संबंध हैं। हम एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, लेकिन भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद और उस पर लगाए गए टैरिफ से वह नाखुश हैं।”

ट्रंप का यह बयान दर्शाता है कि व्यक्तिगत दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी के बावजूद व्यापारिक मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं


रूसी तेल और भारत की रणनीति


रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए। इसके बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी।भारत का तर्क रहा है कि—

  • देश की बड़ी आबादी को सस्ती ऊर्जा उपलब्ध कराना जरूरी है

  • भारत किसी एक देश के दबाव में अपनी आर्थिक नीतियां तय नहीं कर सकता

  • तेल खरीद पूरी तरह से राष्ट्रीय हित में की जा रही है

हालांकि, अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को यह फैसला रास नहीं आया।


भारी टैरिफ से बिगड़ा मूड


अमेरिका की ओर से भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ को लेकर नई दिल्ली पहले ही असंतोष जता चुकी है।विशेषज्ञों के मुताबिक—

  • ये टैरिफ भारत के निर्यात पर असर डाल सकते हैं

  • दोनों देशों के बीच व्यापारिक संतुलन बिगड़ सकता है

  • रणनीतिक साझेदारी पर भी दबाव बढ़ सकता है

ट्रंप के बयान से यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर पीएम मोदी की नाराज़गी वॉशिंगटन तक पहुंच चुकी है


भारत-अमेरिका संबंध: दोस्ती के साथ मतभेद


भारत और अमेरिका के रिश्ते बीते वर्षों में रक्षा, टेक्नोलॉजी, क्वाड और इंडो-पैसिफिक रणनीति के स्तर पर मजबूत हुए हैं।लेकिन इसके बावजूद—

  • व्यापार

  • टैरिफ

  • ऊर्जा नीति

  • रूस के साथ भारत के संबंध

जैसे मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं।


कूटनीतिक भाषा में बड़ा संकेत


राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ट्रंप का यह बयान महज एक टिप्पणी नहीं, बल्कि कूटनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है।इसके जरिए अमेरिका यह संदेश देना चाहता है कि—


  • वह भारत की दोस्ती को महत्व देता है

  • लेकिन वैश्विक नीतियों में उसकी लाइन से अलग रुख स्वीकार्य नहीं है

आगे क्या?

आने वाले समय में भारत और अमेरिका के बीच—

  • व्यापार वार्ता

  • टैरिफ पर बातचीत

  • ऊर्जा सहयोग


जैसे मुद्दों पर नए सिरे से संवाद देखने को मिल सकता है।हालांकि, यह भी तय है कि भारत अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता से समझौता करने के मूड में नहीं है।


डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान एक बार फिर दिखाता है कि भारत-अमेरिका रिश्ते दोस्ती और मतभेद दोनों का मिश्रण हैं।जहां एक ओर मोदी-ट्रंप की व्यक्तिगत केमिस्ट्री चर्चा में रहती है, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय हितों से जुड़े फैसले दोनों देशों को आमने-सामने भी खड़ा कर देते हैं।

Comments


bottom of page