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बिहार की राजनीति में दही-चूड़ा पर सियासी सस्पेंस

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • 2 days ago
  • 3 min read



आरजेडी की हार के बाद पारंपरिक भोज पर संशय, तेज प्रताप के ऐलान से बढ़ी हलचल


बिहार की राजनीति में मकर संक्रांति का त्योहार सिर्फ धार्मिक या सांस्कृतिक महत्व ही नहीं रखता, बल्कि यह सियासी संदेशों का भी बड़ा मंच माना जाता है। खासकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज को लेकर हर साल राजनीतिक हलचल तेज रहती है। लेकिन इस बार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद यह परंपरा सस्पेंस के घेरे में आ गई है।


हर साल मकर संक्रांति के मौके पर पटना स्थित लालू प्रसाद यादव और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास पर दही-चूड़ा भोज का आयोजन होता रहा है, जिसमें सत्ता और विपक्ष के कई बड़े चेहरे शामिल होते हैं। हालांकि, इस बार इस आयोजन को लेकर अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।


लालू-तेजस्वी की गैरमौजूदगी से बढ़ा संशय


दही-चूड़ा भोज को लेकर असमंजस की सबसे बड़ी वजह आरजेडी नेतृत्व की मौजूदा स्थिति है।आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव हाल ही में आंख की सर्जरी के बाद दिल्ली में हैं और वहीं स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी फिलहाल छुट्टियों पर बाहर हैं और अब तक पटना नहीं लौटे हैं।


इन दोनों प्रमुख चेहरों की अनुपस्थिति में यह सवाल उठ रहा है कि—क्या इस साल लालू-राबड़ी आवास पर पारंपरिक दही-चूड़ा भोज होगा?या फिर आरजेडी इस आयोजन को टाल सकती है?


पार्टी की ओर से अब तक इस पर कोई स्पष्ट बयान नहीं आया है, जिससे अटकलों का बाजार गर्म है।


तेज प्रताप यादव के ऐलान से बदला सियासी माहौल


इसी बीच लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने मकर संक्रांति भोज के आयोजन का ऐलान कर सियासी हलचल को और तेज कर दिया है।


तेज प्रताप यादव ने घोषणा की है कि उनका मकर संक्रांति दही-चूड़ा भोज 14 जनवरी को पटना स्थित उनके 26 एम स्टैंड रोड आवास पर आयोजित किया जाएगा।इस ऐलान के साथ ही बिहार की राजनीति में नए संकेतों की चर्चा शुरू हो गई है।


नीतीश से लेकर राज्यपाल तक को न्योता!


तेज प्रताप यादव के भोज को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा निमंत्रण सूची को लेकर हो रही है।सूत्रों के मुताबिक, इस भोज के लिए—

  • मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

  • राज्यपाल

  • राज्य के दोनों उपमुख्यमंत्री

को भी निमंत्रण भेजने की तैयारी है।

इतना ही नहीं, तेज प्रताप ने यह भी साफ कर दिया है कि पार्टी की ओर से उनके छोटे भाई और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को भी औपचारिक रूप से आमंत्रित किया जाएगा।


राजनीतिक संदेशों का मंच बनता दही-चूड़ा


बिहार में दही-चूड़ा भोज को हमेशा से सिर्फ भोज नहीं, बल्कि सियासी संकेत माना जाता रहा है।कौन शामिल हुआ, कौन नहीं आया, और किसे न्योता मिला—इन सभी बातों से राजनीतिक समीकरणों को पढ़ा जाता है।

तेज प्रताप यादव का यह आयोजन ऐसे समय हो रहा है जब—

  • आरजेडी चुनावी हार से उबरने की कोशिश कर रही है

  • विपक्षी एकता और भविष्य की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं

  • और खुद तेज प्रताप का अलग राजनीतिक रुख चर्चा में है


क्या बोलेगा यह भोज?


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेज प्रताप का यह कदम—

  • उनकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने की कोशिश

  • या फिर पारिवारिक और सियासी संतुलन का संदेश'


दोनों हो सकता है।अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं किकौन नेता इस भोज में शामिल होता है और कौन दूरी बनाता है।


एक ओर आरजेडी के पारंपरिक दही-चूड़ा भोज पर सस्पेंस बना हुआ है,तो दूसरी ओर तेज प्रताप यादव के ऐलान ने बिहार की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

14 जनवरी को होने वाला यह भोजबिहार की सियासत में कई बड़े संकेत दे सकता है,जिस पर राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं।


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