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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल का निधन: भारतीय राजनीति में अपूरणीय क्षति

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 12, 2025
  • 2 min read

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल चाकुरकर का आज शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025 को लातूर (महाराष्ट्र) में निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य खराब रहने के कारण घर पर ही इलाज चल रहा था। उन्होंने अपने घर देवघर में सुबह करीब 6:30 बजे अंतिम सांस ली। उनके निधन से महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति में शोक की लहर दौड़ गई है।


एक लंबी और समर्पित राजनीतिक यात्रा


शिवराज पाटिल ने भारतीय राजनीति में लगभग पाँच दशक से अधिक समय तक सक्रिय भूमिका निभाई। उन्होंने:

  • लातूर लोकसभा सीट से सात बार सांसद के रूप में सेवा दी

  • 10वीं लोकसभा के स्पीकर के रूप में जिम्मेदारी निभाई

  • केंद्रीय गृह मंत्री के पद पर कार्य किया

  • रक्षा, वाणिज्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में भी योगदान दिया

  • महाराष्ट्र विधानसभा में उपसभापति और स्पीकर के रूप में भी सेवाएँ दीं

उनका राजनीतिक सफर स्थानीय निकाय से शुरू होकर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचा, जहाँ उन्होंने भारतीय लोकतंत्र की संवैधानिक प्रक्रिया को मजबूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभाई।


गृह मंत्री के रूप में सेवाएँ और जिम्मेदारियाँ


पाटिल ने 2004 से 2008 तक केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में कार्य किया। इस दौरान देश ने कई चुनौतियों का सामना किया, जिनमें 26/11 मुंबई आतंकी हमलों जैसे गंभीर हादसे शामिल हैं। इन हमलों के बाद उन्होंने गृह मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी के तौर पर लिया।

उनके गृह मंत्री के रूप में कार्यकाल को राजनीति में कई बार बहस और आलोचना का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उनके समर्थक उन्हें एक ज्ञानी और ईमानदार व्यक्ति के रूप में याद करते हैं।


दिग्गज नेताओं ने व्यक्त की शोक संवेदनाएँ


उनके निधन पर देशभर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पाटिल एक अनुभवी नेता थे जिन्होंने समाज की भलाई के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में कई अहम पदों पर कार्य किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, और कई अन्य प्रमुख नेताओं ने भी उनके निधन पर दुःख व्यक्त किया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के रूप में उनकी भूमिका को याद करते हुए कई नेताओं ने उन्हें लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं के प्रति मेहनती और सम्मानित सेवक बताया।


पारिवारिक जीवन और अंतिम समय


शिवराज पाटिल अपने बेटे शैलेश पाटिल, बहू अर्चना पाटिल और दो पोतियों के साथ रहते थे। बहू अर्चना पाटिल का राजनीतिक से जुड़ाव भी रहा है और उन्होंने पिछली विधानसभा चुनावों में भाग लिया था। उनके निधन से परिवार, समर्थक, राजनीतिक मित्र और देशभर के नागरिक गहरे शोक में हैं।


विरासत और यादें


शिवराज पाटिल को न केवल एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता के रूप में देखा जाता था, बल्कि उन्हें एक संवैधानिक गुरु और दिग्गज राजनीतिज्ञ के रूप में भी सम्मान मिला। उनकी भाषा पर पकड़, लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता और संसद संचालन में उनकी महारत ने उन्हें राजनीति के एक प्रतिष्ठित चेहरे के रूप में स्थापित किया।


उनका व्यक्तित्व और उनके द्वारा निभाई गई भूमिका भारतीय राजनीति के इतिहास में हमेशा याद रखी जाएगी।


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