राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईएनएस वाघशीर पर की समुद्री यात्रा, इतिहास रचने वाली बनीं दूसरी राष्ट्रपति
- Lucky Kumar
- Dec 29, 2025
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देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को भारतीय नौसेना के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ते हुए पश्चिमी तट पर अग्रिम पंक्ति की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर (INS Vagsheer) पर सवार होकर समुद्री यात्रा की। इस ऐतिहासिक यात्रा के साथ ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पनडुब्बी में सफर करने वाली देश की दूसरी राष्ट्रपति बन गई हैं।
इससे पहले वर्ष फरवरी 2006 में देश के पूर्व राष्ट्रपति और ‘मिसाइल मैन’ के नाम से प्रसिद्ध डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भारतीय नौसेना की पनडुब्बी में समुद्री यात्रा की थी। करीब 18 वर्षों बाद किसी राष्ट्रपति द्वारा दोबारा ऐसा साहसिक और गौरवपूर्ण अनुभव किया गया है।
भारतीय नौसेना के शौर्य का प्रतीक है INS वाघशीर
आईएनएस वाघशीर भारतीय नौसेना की अत्याधुनिक और अग्रिम पंक्ति की पनडुब्बियों में शामिल है। यह पनडुब्बी देश की समुद्री सुरक्षा, निगरानी और रणनीतिक शक्ति का अहम हिस्सा मानी जाती है। राष्ट्रपति की इस यात्रा को भारतीय नौसेना के मनोबल और आत्मनिर्भर भारत अभियान की दिशा में एक बड़ा संदेश माना जा रहा है।
समुद्री यात्रा के दौरान राष्ट्रपति ने पनडुब्बी पर तैनात अधिकारियों और नौसैनिकों से बातचीत की और उनके साहस, समर्पण व अनुशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना देश की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभा रही है।
नौसेना के जवानों का बढ़ा मनोबल
राष्ट्रपति की मौजूदगी से पनडुब्बी में तैनात जवानों का मनोबल काफी ऊंचा देखने को मिला। यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि भारतीय सशस्त्र बलों के प्रति सर्वोच्च संवैधानिक पद की प्रतिबद्धता और सम्मान को भी दर्शाती है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जवानों को संबोधित करते हुए कहा कि देश को अपने सशस्त्र बलों पर गर्व है और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उनका योगदान अतुलनीय है।
ऐतिहासिक यात्रा का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, राष्ट्रपति का पनडुब्बी पर सवार होकर समुद्री यात्रा करना एक मजबूत रणनीतिक संदेश भी है। यह दर्शाता है कि भारत न केवल थल और वायु सीमा पर बल्कि समुद्री क्षेत्र में भी पूरी तरह सक्षम और सतर्क है।
यह यात्रा खासतौर पर ऐसे समय में हुई है, जब हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका लगातार मजबूत हो रही है और नौसेना के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पहले भी रच चुका है इतिहास
गौरतलब है कि वर्ष 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी पनडुब्बी से समुद्री यात्रा कर इतिहास रचा था। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए नया अध्याय जोड़ा है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की आईएनएस वाघशीर पर समुद्री यात्रा न केवल एक ऐतिहासिक घटना है, बल्कि यह भारतीय नौसेना की ताकत, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र की सुरक्षा प्रतिबद्धता का प्रतीक भी है। यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और देश के जवानों के मनोबल को और मजबूत करेगा।




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