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31 दिसंबर को देशभर में गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की हड़ताल, स्विगी-जोमैटो से लेकर अमेज़न-फ्लिपकार्ट तक सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 29, 2025
  • 2 min read

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क्रिसमस के दिन हुई हड़ताल के बाद अब देशभर के गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स ने एक बार फिर बड़े आंदोलन का ऐलान किया है। वेतन, सुरक्षा और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग को लेकर 31 दिसंबर को पूरे देश में हड़ताल की जाएगी। इस हड़ताल में स्विगी, जोमैटो, अमेज़न, फ्लिपकार्ट, ब्लिंकिट और ज़ेप्टो जैसी प्रमुख कंपनियों से जुड़े कर्मचारी शामिल होंगे।


यह हड़ताल इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन के आह्वान पर बुलाई गई है।


क्रिसमस हड़ताल के बाद बढ़ा आंदोलन


गौरतलब है कि 25 दिसंबर को भी गिग वर्कर्स ने कई राज्यों में काम बंद कर विरोध प्रदर्शन किया था। हालांकि उस दौरान कंपनियों की ओर से कोई ठोस आश्वासन न मिलने के बाद यूनियनों ने अब नए साल से पहले देशव्यापी हड़ताल का फैसला लिया है।


वर्कर्स का कहना है कि बढ़ती महंगाई के बीच उनकी आय में कटौती की जा रही है, जबकि काम का दबाव लगातार बढ़ रहा है।


किन मांगों को लेकर हो रही है हड़ताल?


गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:


  • न्यूनतम सुनिश्चित वेतन

  • ईंधन और महंगाई के अनुरूप इंसेंटिव

  • दुर्घटना और स्वास्थ्य बीमा

  • काम के घंटों में पारदर्शिता

  • बिना कारण अकाउंट ब्लॉक करने पर रोक

  • सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य परिस्थितियां


वर्कर्स का आरोप है कि कंपनियां उन्हें कर्मचारी नहीं बल्कि ‘पार्टनर’ बताकर श्रम कानूनों से बचने की कोशिश करती हैं।


डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाएं हो सकती हैं प्रभावित


31 दिसंबर को होने वाली इस हड़ताल का असर इंस्टेंट डिलीवरी, फूड डिलीवरी और ई-कॉमर्स सेवाओं पर पड़ सकता है। खासतौर पर नए साल की पूर्व संध्या पर जब ऑनलाइन ऑर्डर में भारी बढ़ोतरी होती है, तब इस हड़ताल से ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अगर बड़ी संख्या में वर्कर्स हड़ताल में शामिल होते हैं तो कई शहरों में सेवाएं आंशिक या पूरी तरह ठप हो सकती हैं।


यूनियनों का क्या कहना है?


IFAT और तेलंगाना गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स यूनियन का कहना है कि यह आंदोलन किसी एक कंपनी के खिलाफ नहीं बल्कि पूरे गिग इकॉनॉमी सिस्टम में सुधार के लिए है। उनका कहना है कि जब तक सरकार और कंपनियां मिलकर गिग वर्कर्स के लिए स्पष्ट नीतियां नहीं बनातीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।


कंपनियों की प्रतिक्रिया का इंतजार


फिलहाल स्विगी, जोमैटो, अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों की ओर से इस हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि पहले भी कंपनियां यह कह चुकी हैं कि वे अपने डिलीवरी पार्टनर्स के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही हैं।


31 दिसंबर को प्रस्तावित गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की देशव्यापी हड़ताल न केवल कंपनियों बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ा संकेत है। तेजी से बढ़ती गिग इकॉनॉमी में काम करने वाले लाखों वर्कर्स अब अपने अधिकारों और सुरक्षा को लेकर एकजुट होते नजर आ रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस आंदोलन का क्या परिणाम निकलता है और क्या सरकार व कंपनियां उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करती हैं।

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