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इंदौर में दूषित पानी से मौतें ‘सिस्टम की बनाई हुई आपदा’: वॉटरमैन ऑफ इंडिया राजेंद्र सिंह का बड़ा आरोप

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • 3 days ago
  • 3 min read


देश में जल संरक्षण के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले और ‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ के नाम से मशहूर राजेंद्र सिंह ने इंदौर में दूषित पीने के पानी से हुई मौतों को लेकर सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। मैगसेसे अवॉर्ड विजेता राजेंद्र सिंह ने इस पूरे मामले को “सिस्टम की बनाई हुई आपदा” करार देते हुए कहा कि इसके पीछे गहरे तक फैला भ्रष्टाचार जिम्मेदार है।


उन्होंने चिंता जताई कि इंदौर जैसे शहर में, जिसे लगातार कई वर्षों से भारत का सबसे साफ शहर घोषित किया जाता रहा है, वहां दूषित पानी से लोगों की जान जाना बेहद गंभीर और शर्मनाक है।


“यह प्राकृतिक नहीं, मानव-निर्मित त्रासदी है”


राजेंद्र सिंह ने कहा कि इंदौर में दूषित पीने के पानी की वजह से लोगों की मौत कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि मानव-निर्मित संकट है।उन्होंने आरोप लगाया कि पानी की सप्लाई व्यवस्था में जानबूझकर की गई लापरवाही और भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को खोखला कर दिया है।

उनके मुताबिक, यह हादसा अचानक नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से चली आ रही गलत नीतियों और भ्रष्ट कार्यप्रणाली का नतीजा है।


ठेकेदारों पर गंभीर आरोप


‘वॉटरमैन ऑफ इंडिया’ ने आरोप लगाया कि पैसे बचाने और मुनाफा बढ़ाने के लिए कई ठेकेदार पीने के पानी की पाइपलाइन को ड्रेनेज और सीवेज लाइनों के बेहद करीब बिछा देते हैं।इस वजह से थोड़ी सी तकनीकी गड़बड़ी या पाइपलाइन में लीकेज होने पर सीवेज का गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल जाता है।


उन्होंने कहा कि यह सब नियमों की खुलेआम अनदेखी और प्रशासनिक मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।


“भ्रष्टाचार ने पूरे सिस्टम को बर्बाद कर दिया”


राजेंद्र सिंह ने दो टूक कहा कि भ्रष्टाचार ने देश की जल आपूर्ति व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है।उन्होंने कहा,


“जब तक सिस्टम में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं आएगी, तब तक ऐसे हादसे होते रहेंगे।”


उनके अनुसार, इंदौर की घटना इसी भ्रष्ट सिस्टम का सीधा नतीजा है, जहां ठेके, निरीक्षण और मेंटेनेंस सब कुछ कागजों तक सीमित रह जाता है।


सबसे साफ शहर में गंदे पानी का संकट


इंदौर को स्वच्छता सर्वेक्षण में लगातार शीर्ष स्थान मिलने पर सवाल उठाते हुए राजेंद्र सिंह ने कहा कि सिर्फ कचरा साफ करना ही स्वच्छता नहीं है।अगर किसी शहर के नागरिकों को सुरक्षित और शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा, तो उस शहर को वास्तव में स्वच्छ कहना गलत होगा।

उन्होंने कहा कि स्वच्छता की परिभाषा में साफ पानी, मजबूत सीवेज सिस्टम और स्वास्थ्य सुरक्षा को भी शामिल किया जाना चाहिए।


जवाबदेही तय करने की मांग


राजेंद्र सिंह ने मांग की कि इस पूरे मामले में

  • दोषी अधिकारियों

  • ठेकेदारों

  • और सिस्टम की निगरानी करने वाली एजेंसियों

की जवाबदेही तय की जाए और सख्त कार्रवाई हो।


उन्होंने कहा कि सिर्फ जांच के आदेश देना काफी नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए नीति स्तर पर सुधार जरूरी है।


आम जनता की जान सबसे ऊपर


उन्होंने कहा कि विकास और बजट बचत के नाम पर आम जनता की जान से समझौता नहीं किया जा सकता।पेयजल जैसी बुनियादी जरूरत में लापरवाही सीधे लोगों की जिंदगी पर हमला है।


चेतावनी और संदेश


अंत में राजेंद्र सिंह ने चेतावनी दी कि अगर जल आपूर्ति व्यवस्था में मौजूद खामियों और भ्रष्टाचार को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो आने वाले समय में ऐसे संकट और भी शहरों में देखने को मिल सकते हैं।


उन्होंने सरकारों और प्रशासन से अपील की कि पानी को व्यापार नहीं, जीवन का अधिकार मानकर नीतियां बनाई जाएं।

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