SIR को लेकर ममता बनर्जी का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला, CEC ज्ञानेश कुमार को फिर लिखा पत्र
- Lucky Kumar
- 3 days ago
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को लेकर एक बार फिर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर गंभीर आपत्ति जताई है। ममता बनर्जी ने पत्र में आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं, प्रक्रियात्मक उल्लंघन और प्रशासनिक खामियां सामने आ रही हैं, जो लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के लिए खतरा बन सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इन खामियों को तुरंत दूर नहीं किया गया, तो बड़ी संख्या में मतदाताओं का वोट देने का अधिकार छिन सकता है, जो सीधे तौर पर लोकतांत्रिक शासन पर हमला होगा।
“पत्र लिखने के लिए विवश हूं” – ममता बनर्जी
अपने पत्र में ममता बनर्जी ने लिखा कि वह इस मुद्दे को लेकर पहले भी चिंता जता चुकी हैं, लेकिन हालात में कोई सुधार न होने के कारण उन्हें एक बार फिर पत्र लिखने के लिए विवश होना पड़ा।उन्होंने कहा कि SIR के दौरान जिस तरह की प्रक्रियाएं अपनाई जा रही हैं, वे न केवल अव्यवस्थित हैं बल्कि कई मामलों में मनमानी और अनियोजित भी दिखाई दे रही हैं।
SIR प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
मुख्यमंत्री के अनुसार, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने या उन्हें संदेह के दायरे में रखने की आशंका है।ममता बनर्जी ने कहा कि यह प्रक्रिया अगर मौजूदा स्वरूप में जारी रही, तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों और लोकतांत्रिक अधिकारों को होगा।
“वोट का अधिकार छिनना लोकतंत्र पर हमला”
पत्र में ममता बनर्जी ने जोर देकर कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। यदि किसी भी प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण नागरिकों को वोट देने से वंचित किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के मूल ढांचे पर सीधा प्रहार है।उन्होंने चेतावनी दी कि SIR के कारण यदि बड़ी संख्या में मतदाता प्रभावित होते हैं, तो इसके गंभीर राजनीतिक और सामाजिक परिणाम हो सकते हैं।
चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त से आग्रह किया है कि या तो SIR में मौजूद खामियों को तत्काल प्रभाव से सुधारा जाए, या फिर इस पूरी प्रक्रिया को तब तक के लिए रोक दिया जाए, जब तक इसे पारदर्शी और निष्पक्ष नहीं बनाया जाता।उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि वह हर योग्य नागरिक के मताधिकार की रक्षा करे।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी हलचल
ममता बनर्जी के इस पत्र के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों और सत्तारूढ़ दल के बीच SIR को लेकर टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।TMC का आरोप है कि SIR के जरिए मतदाता सूची में छेड़छाड़ कर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि विपक्ष इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहा है।
आगे क्या?
अब सबकी नजरें चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि आयोग ममता बनर्जी की चिंताओं पर क्या रुख अपनाता है और क्या SIR प्रक्रिया में कोई बदलाव किया जाता है या नहीं।
फिलहाल, यह मुद्दा न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि देशभर में मतदाता अधिकार और लोकतांत्रिक पारदर्शिता को लेकर एक बड़ी बहस का रूप लेता नजर आ रहा है।




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