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संसद पर आतंकी हमले की 24वीं बरसी: शहीदों को नमन, पीएम मोदी ने कहा—देश कभी नहीं भूलेगा उनका बलिदान

  • Writer: Sonu Yadav
    Sonu Yadav
  • Dec 13, 2025
  • 2 min read

नई दिल्ली: 13 दिसंबर 2001 को संसद भवन पर हुए आतंकी हमले की 24वीं बरसी पर आज पूरा देश वीर शहीदों को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद कर रहा है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में शहीद सुरक्षाकर्मियों को पुष्पांजलि अर्पित की और उनके अद्वितीय साहस को नमन किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति, राज्यसभा के सभापति सहित केंद्र सरकार के कई मंत्री, सांसद और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।


श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। दो मिनट का मौन रखकर शहीद जवानों को याद किया गया, जिन्होंने लोकतंत्र के मंदिर की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि संसद पर हुआ हमला केवल एक इमारत पर नहीं, बल्कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था और संप्रभुता पर सीधा हमला था। उन्होंने कहा कि हमारे सुरक्षाबलों ने जिस बहादुरी, सूझबूझ और तत्परता के साथ आतंकियों का सामना किया, वह पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।


पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद जवानों का बलिदान देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उन्होंने कहा कि जिन जवानों ने उस दिन आतंकियों को आगे बढ़ने से रोका, उनकी वजह से न केवल संसद में मौजूद जनप्रतिनिधियों की जान बची, बल्कि देश के लोकतंत्र की भी रक्षा हुई। उनका यह त्याग आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रसेवा, साहस और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता रहेगा।


गौरतलब है कि 13 दिसंबर 2001 को आतंकियों ने संसद भवन में घुसपैठ करने की कोशिश की थी। हथियारों से लैस आतंकियों ने सुरक्षा बलों पर हमला किया, लेकिन तैनात जवानों ने अदम्य साहस दिखाते हुए उन्हें संसद के भीतर प्रवेश करने से पहले ही रोक लिया। इस मुठभेड़ में कई सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए, लेकिन उनकी कुर्बानी के चलते एक बड़ा संकट टल गया। यह घटना भारत के आतंकवाद विरोधी संघर्ष का एक अहम मोड़ मानी जाती है।


श्रद्धांजलि समारोह में मौजूद नेताओं ने शहीदों के परिवारों के प्रति भी अपनी संवेदना व्यक्त की। वक्ताओं ने कहा कि देश हमेशा अपने शहीदों और उनके परिजनों का ऋणी रहेगा। सरकार की ओर से यह भी दोहराया गया कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति जीरो टॉलरेंस की है और देश की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।


हर साल 13 दिसंबर को संसद हमले में शहीद हुए जवानों को याद किया जाता है। यह दिन न केवल शोक और स्मरण का दिन है, बल्कि एक दृढ़ संकल्प का भी प्रतीक है—कि भारत आतंकवाद के आगे कभी नहीं झुकेगा, लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट रहेगा और शहीदों के बलिदान को कभी व्यर्थ नहीं जाने देगा।


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