महाराष्ट्र में बालासाहेब ठाकरे की विरासत फिर मजबूत, उद्धव–राज ठाकरे 20 साल बाद एकसाथ, BMC चुनाव से पहले बड़ा सियासी गठबंधन
- Lucky Kumar
- Dec 24, 2025
- 2 min read

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना की ताकत बढ़ती हुई दिखाई दे रही है। करीब 20 साल बाद ठाकरे परिवार के दो बड़े चेहरे—उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे—एक बार फिर एक मंच पर आते नजर आए हैं। बीएमसी चुनाव 2026 से पहले शिवसेना (यूबीटी) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने औपचारिक रूप से गठबंधन का ऐलान कर दिया है, जिससे राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा हो गई है।
20 साल बाद ठाकरे एकता की वापसी
बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने वाले उनके बेटे उद्धव ठाकरे और भतीजे राज ठाकरे लंबे समय से अलग-अलग राजनीतिक राह पर थे। दोनों के बीच मतभेदों के कारण महाराष्ट्र की राजनीति दो हिस्सों में बंटी नजर आती थी।अब दो दशकों बाद दोनों नेताओं का साथ आना मराठी अस्मिता और शिवसेना की मूल विचारधारा को फिर से मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
BMC चुनाव 2026 पर नजर
मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव को देश के सबसे अहम नगर निकाय चुनावों में गिना जाता है। बीएमसी पर दशकों तक शिवसेना का दबदबा रहा है।गठबंधन के जरिए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे की कोशिश है कि:
मराठी वोट बैंक को एकजुट किया जाए
मुंबई में शिवसेना की पुरानी पकड़ वापस लाई जाए
भाजपा और अन्य दलों को कड़ी चुनौती दी जाए
कार्यकर्ताओं में उत्साह का माहौल
इस गठबंधन का इंतजार शिवसेना यूबीटी और मनसे के नेताओं व कार्यकर्ताओं को लंबे समय से था। गठबंधन की घोषणा के बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। कई जगहों पर कार्यकर्ताओं ने इसे “बालासाहेब ठाकरे के सपनों की वापसी” करार दिया है।
उद्धव और राज ठाकरे का संदेश
सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं ने साफ किया है कि यह गठबंधन सिर्फ सत्ता के लिए नहीं, बल्कि महाराष्ट्र और मराठी मान-सम्मान की रक्षा के लिए किया गया है।उद्धव ठाकरे ने जहां इसे बालासाहेब की विचारधारा को आगे बढ़ाने का कदम बताया, वहीं राज ठाकरे ने कहा कि समय की मांग है कि मराठी ताकतें एकजुट हों।
महाराष्ट्र की राजनीति में क्या बदलेगा?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह गठबंधन:
मुंबई और ठाणे बेल्ट में समीकरण बदल सकता है
मराठी वोटों का बिखराव रोक सकता है
आगामी लोकल बॉडी और विधानसभा चुनावों में बड़ा असर डाल सकता है
साथ ही, यह गठबंधन भाजपा और अन्य दलों की रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।
बालासाहेब ठाकरे की विरासत का असर
बालासाहेब ठाकरे सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक विचारधारा थे। उद्धव–राज की एकजुटता को उसी विरासत की राजनीतिक पुनर्जीवन के रूप में देखा जा रहा है।लंबे समय बाद ठाकरे परिवार की यह एकता शिवसेना समर्थकों के लिए भावनात्मक क्षण भी बन गई है।
बीएमसी चुनाव 2026 से पहले उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का गठबंधन महाराष्ट्र की राजनीति में गेमचेंजर साबित हो सकता है। यह सिर्फ दो दलों का साथ आना नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की राजनीतिक विरासत को फिर से मजबूत करने की कोशिश है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह गठबंधन कितनी मजबूती से मैदान में उतरता है और महाराष्ट्र की सियासत को किस दिशा में ले जाता है।




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