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भूपेश बघेल के बयान पर बाबा बागेश्वर का तीखा पलटवार, आस्था बनाम अंधविश्वास की बहस फिर तेज

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 26, 2025
  • 3 min read


छत्तीसगढ़ की सियासत में एक बार फिर धर्म, आस्था और अंधविश्वास को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। बाबा बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, जिन्हें बाबा बागेश्वर के नाम से जाना जाता है, ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर कड़ा और आक्रामक जवाब दिया है। बाबा बागेश्वर ने साफ शब्दों में कहा कि अगर हिंदू समाज को एकजुट करना, भक्ति का प्रसार करना और राष्ट्रवाद की भावना जगाना अंधविश्वास है, तो ऐसा मानने वालों को इस देश में नहीं रहना चाहिए।


दरअसल, यह विवाद तब शुरू हुआ जब भूपेश बघेल ने कथावाचक प्रदीप मिश्रा और बाबा बागेश्वर पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा था कि देश में हिंदू कभी खतरे में नहीं रहे और कुछ लोग जानबूझकर समाज में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद धार्मिक और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।


बाबा बागेश्वर का करारा जवाब


भूपेश बघेल के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बाबा बागेश्वर ने कहा,“अगर हिंदू समाज को जोड़ना, सनातन धर्म की बात करना, भक्ति और राष्ट्रभक्ति का संदेश देना अंधविश्वास है, तो जिन्हें ऐसा लगता है उन्हें इस देश को छोड़ देना चाहिए।”उन्होंने आगे कहा कि सनातन धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जोड़ने, नैतिकता सिखाने और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य निभाने की प्रेरणा देता है।


बाबा बागेश्वर ने यह भी स्पष्ट किया कि उनके प्रवचनों और कथाओं का उद्देश्य किसी को गुमराह करना नहीं, बल्कि लोगों को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज को कमजोर करने के लिए बार-बार आस्था को अंधविश्वास बताने की कोशिश की जाती है, जिसे वह किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेंगे।


अंधविश्वास और आस्था के बीच फर्क


अपने बयान में बाबा बागेश्वर ने अंधविश्वास और आस्था के बीच फर्क को विस्तार से समझाया। उन्होंने कहा कि अंधविश्वास वह होता है, जो इंसान को अज्ञान, डर और शोषण की ओर ले जाए, जबकि भक्ति और सनातन परंपरा व्यक्ति को आत्मविश्वास, अनुशासन और समाज सेवा की प्रेरणा देती है।उन्होंने सवाल उठाया कि क्या राम कथा सुनना, भगवान का नाम लेना, या देश और समाज की एकता की बात करना अंधविश्वास कहलाता है?


भूपेश बघेल के बयान का राजनीतिक अर्थ


राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भूपेश बघेल का बयान केवल धार्मिक मुद्दा नहीं, बल्कि इसके पीछे राजनीतिक रणनीति भी हो सकती है। छत्तीसगढ़ में चुनावी माहौल और बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच धर्म और तर्कवाद का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है।भूपेश बघेल खुद को वैज्ञानिक सोच और तर्कवाद का समर्थक बताते रहे हैं, जबकि बाबा बागेश्वर जैसे धार्मिक गुरु इसे सनातन परंपरा पर सीधा हमला मान रहे हैं।


समर्थकों और विरोधियों की प्रतिक्रिया


बाबा बागेश्वर के बयान के बाद उनके समर्थकों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोग उनके समर्थन में पोस्ट कर रहे हैं और इसे सनातन धर्म की आवाज बता रहे हैं। कई लोग इसे हिंदू समाज की एकजुटता का प्रतीक मान रहे हैं।वहीं दूसरी ओर, विरोधी वर्ग का कहना है कि इस तरह के बयान समाज को और ज्यादा ध्रुवीकरण की ओर ले जाते हैं और धर्म को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए।


छत्तीसगढ़ से देशव्यापी बहस


यह विवाद अब केवल छत्तीसगढ़ तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देशभर में आस्था बनाम अंधविश्वास की बहस को फिर से हवा दे रहा है। सवाल यह है कि धार्मिक कथाएं और प्रवचन समाज को जोड़ने का माध्यम हैं या फिर इन्हें अंधविश्वास की श्रेणी में रखा जाना चाहिए।

फिलहाल, बाबा बागेश्वर और भूपेश बघेल के बयानों ने राजनीतिक और धार्मिक गलियारों में हलचल मचा दी है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, जिससे यह बहस और गहराने वाली है।


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