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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हिंसा के बीच मौलाना साजिद रशीदी का बयान, बयान ने खड़ा किया नया विवाद

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 27, 2025
  • 2 min read


नई दिल्ली। बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। मंदिरों में तोड़फोड़, घरों को निशाना बनाए जाने और हमलों की खबरों के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ती जा रही है। इसी बीच ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया है।


मौलाना साजिद रशीदी ने बांग्लादेश की मौजूदा स्थिति को लेकर वहां की यूनुस सरकार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में जो कुछ भी हो रहा है, उसके लिए सीधे तौर पर वहां की सरकार जवाबदेह है और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है।


“नरसंहार” शब्द को लेकर उठाया सवाल


अपने बयान में मौलाना साजिद रशीदी ने भारत और बांग्लादेश में होने वाली हिंसक घटनाओं की तुलना करते हुए “नरसंहार” (Genocide) शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि NCRB (नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो) के आंकड़ों के अनुसार भारत में ‘जय श्री राम’ का नारा लगाने वाली भीड़ द्वारा 52 लोगों की मॉब लिंचिंग की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन इन्हें नरसंहार नहीं कहा जाता।

उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा,


“अगर 50 से अधिक लोगों की हत्या होती है, तो उसे नरसंहार मानने में हिचक क्यों होती है? क्या यह दोहरी मानसिकता नहीं है?”

मौलाना साजिद रशीदी के इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक तीखी बहस शुरू हो गई है।


बयान पर सियासी और सामाजिक प्रतिक्रिया


मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बताते हुए समर्थन किया, जबकि कई संगठनों ने इसे संवेदनशील मुद्दे पर भड़काऊ बयान करार दिया है।

विरोध करने वालों का कहना है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को भारत की आंतरिक घटनाओं से जोड़ना गलत है और इससे मूल मुद्दे से ध्यान भटकता है। उनका आरोप है कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा एक गंभीर मानवीय संकट है, जिसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए।


बांग्लादेश में हालात पर बढ़ती चिंता


गौरतलब है कि बांग्लादेश में हाल के दिनों में कई इलाकों से हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा, धमकी और पलायन की खबरें सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी इन घटनाओं पर चिंता जताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।


भारत में भी इस मुद्दे को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। कई नेताओं ने केंद्र सरकार से बांग्लादेश के समक्ष यह मुद्दा कूटनीतिक स्तर पर उठाने की मांग की है।


संवेदनशील मुद्दों पर जिम्मेदार बयान की जरूरत


विशेषज्ञों का मानना है कि धर्म और अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दे बेहद संवेदनशील होते हैं और ऐसे मामलों में सार्वजनिक मंचों से दिए गए बयानों का असर समाज पर गहरा पड़ता है। ऐसे में जिम्मेदार और संतुलित भाषा का प्रयोग बेहद जरूरी है, ताकि किसी भी तरह की सामाजिक या सांप्रदायिक तनाव की स्थिति न बने।


फिलहाल मौलाना साजिद रशीदी का यह बयान चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर सियासी बहस और तेज होने की संभावना है।

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