बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन, 80 वर्ष की आयु में दुनिया को किया अलविदा
- Lucky Kumar
- Dec 30, 2025
- 3 min read

ढाका, 30 दिसंबर, 2025:बांग्लादेश की इतिहास में एक प्रभावशाली और विवादित राजनीतिक शख्सियत रही खालिदा जिया का मंगलवार सुबह तड़के ढाका के एवरकेयर अस्पताल में निधन हो गया। BNP के वेरिफाइड फेसबुक पेज पर जारी एक बयान में कहा गया कि खालिदा जिया ने फज्र की नमाज के ठीक बाद लगभग सुबह 6 बजे अंतिम सांस ली। उनकी उम्र 80 वर्ष थी।
स्वास्थ्य कारण और अस्पताल में इलाज
खालिदा जिया पिछले कई वर्षों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं। डॉक्टरों के अनुसार उन्हें कई गंभीर बीमारियाँ थीं, जिनमें शामिल हैं:
लीवर सिरोसिस (liver cirrhosis)
गठिया (arthritis)
मधुमेह (diabetes)
छाती और हृदय से जुड़ी जटिलताएँ
फेफड़ों और लंग संक्रमण
उन्हें 23 नवंबर 2025 को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और 11 दिसंबर से वे वेंटिलेटर सपोर्ट पर थीं, लेकिन उनकी हालत में धीरे-धीरे गिरावट आई। कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों ने प्रस्तावित किया कि उन्हें आगे इलाज के लिए विदेश भेजा जाए, लेकिन उनकी स्थिति की गंभीरता के कारण यह संभव नहीं हो पाया।
राजनीति और विरासत
खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की एक सबसे प्रमुख नेता थीं। वे पहली महिला प्रधानमंत्री थीं जिन्होंने लोकतांत्रिक चुनाव के ज़रिये शासन स्थापित किया — एक उपलब्धि जिसने उन्हें दक्षिण और दक्षिण-एशियाई राजनीति में विशेष स्थान दिलाया।
उनकी राजनीतिक यात्रा में कई महत्वपूर्ण चरण रहे हैं:
1991 से 1996 और 2001 से 2006 तक उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया।
उनकी नेतृत्व शैली ने देश की राजनीतिक दिशा को गहराई से प्रभावित किया, खासकर सीधे चुनावों, लोकतंत्र के संवर्द्धन, और विपक्षी नेतृत्व की भूमिका में।
वे Awami League की शीख हसीना की प्रमुख विरोधी थीं, और दोनों के बीच जारी “बैटल ऑफ़ बेगम्स” (Begums) के रूप में राजनीति जगत में लंबे समय तक उल्लेखनीय प्रतिद्वंद्विता रही।
उनके करियर में भ्रष्टाचार के आरोपों और उनके समर्थनकर्ताओं द्वारा उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध का निशाना बताने वाले विवाद भी शामिल रहे। हालांकि जनवरी 2025 में एक प्रमुख भ्रष्टाचार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, जिससे वे आगामी चुनाव में भाग ले सकती थीं।
राजनीतिक माहौल और आगामी चुनौतियाँ
उनका निधन ऐसे समय पर हुआ है जब बांग्लादेश में फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों की तैयारी चल रही थी। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कहा था कि वे चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही थीं, और सोमवार को ही उनके नामांकन दाखिल किए गए थे, हालांकि वह अस्पताल में ही थीं।
उनके निधन के बाद BNP में नया नेतृत्व और पार्टी की रणनीति अब बड़ी चुनौती होगी। उनके पुत्र तारिक रहमान, जो लंबे समय विदेश में थे और हाल ही में बांग्लादेश लौटे थे, अब पार्टी की अगली बड़ी उम्मीद माने जा रहे हैं।
दुनिया और भारत-बांग्लादेश पर प्रभाव
खालिदा जिया के निधन पर दुनियाभर के नेताओं ने शोक व्यक्त किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खालिदा जिया के साथ हुई अपनी पुरानी मुलाकात की यादें साझा करते हुए बांग्लादेश की जनता के प्रति संवेदना व्यक्त की है।
बांग्लादेश की राजनीति में खालिदा जिया की अनुपस्थिति एक बड़ा राजनीतिक मोड़ होगा। उनके राजनीतिक विरोधी और समर्थक दोनों ही इस बात पर विचार करेंगे कि देश की राजनीति अब किस दिशा में आगे बढ़ेगी। उनके नेतृत्व में BNP की दिशा ने दशकों तक बांग्लादेश की राजनीतिक गतिशीलता को परिभाषित किया था।
समापन विचार
खालिदा जिया का निधन सिर्फ एक राजनीतिक नेता के जाने जैसा नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की लोकतांत्रिक राजनीति के एक युग के अंत का प्रतीक भी माना जा रहा है। उनके जीवन, राजनीति और संघर्षों का प्रभाव लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।




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