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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि, राहुल गांधी ने दी श्रद्धांजलि

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 26, 2025
  • 3 min read


भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रख्यात अर्थशास्त्री और सरल व्यक्तित्व के धनी डॉ. मनमोहन सिंह की आज पहली पुण्यतिथि है। इस अवसर पर देशभर में उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जा रहा है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस मौके पर उन्हें पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह देश की राजनीति में ईमानदारी, ज्ञान और गरिमा का प्रतीक थे।


डॉ. मनमोहन सिंह ऐसे नेता रहे, जिन्होंने सत्ता में रहते हुए भी सादगी और शालीनता को कभी नहीं छोड़ा। उनकी पहली पुण्यतिथि पर देश उन्हें एक ऐसे प्रधानमंत्री के रूप में याद कर रहा है, जिन्होंने बिना किसी शोर-शराबे के भारत की अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र को मजबूत किया।


साधारण शुरुआत, असाधारण सफर


डॉ. मनमोहन सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के गाह (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद उनका परिवार भारत आ गया। संघर्षों से भरे बचपन के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा सहारा बनाया। पंजाब विश्वविद्यालय से पढ़ाई के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय और फिर ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में उच्च शिक्षा प्राप्त की।


उनकी विद्वता और मेहनत ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक प्रतिष्ठित अर्थशास्त्री के रूप में स्थापित किया। यही वजह थी कि वे बाद में भारत के आर्थिक और राजनीतिक ढांचे का अहम हिस्सा बने।


1991 के आर्थिक सुधार: भारत की दिशा बदलने वाला फैसला


डॉ. मनमोहन सिंह को सबसे ज्यादा पहचान 1991 में मिले आर्थिक सुधारों के लिए मिली। उस समय भारत गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा था और विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म होने की कगार पर था। वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने साहसिक फैसले लेते हुए उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की नीतियों को लागू किया।


इन सुधारों ने न केवल भारतीय अर्थव्यवस्था को संकट से बाहर निकाला, बल्कि उसे तेज विकास के रास्ते पर भी डाला। आज भारत जिस आर्थिक मजबूती की ओर बढ़ रहा है, उसकी नींव उसी दौर में रखी गई थी। इसी वजह से उन्हें “भारतीय आर्थिक सुधारों का शिल्पकार” भी कहा जाता है।


प्रधानमंत्री के रूप में एक दशक का कार्यकाल


2004 में डॉ. मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने और 2014 तक दो कार्यकाल पूरे किए। यह भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण दौर था। उनके नेतृत्व में भारत ने आर्थिक, सामाजिक और कूटनीतिक मोर्चों पर कई अहम उपलब्धियां हासिल कीं।


मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना, सूचना का अधिकार (RTI) कानून, शिक्षा का अधिकार (RTE) और खाद्य सुरक्षा कानून जैसे कदम उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियां मानी जाती हैं। इन योजनाओं ने करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया।


विदेश नीति में मजबूती


डॉ. मनमोहन सिंह ने विदेश नीति के क्षेत्र में भी भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया। भारत-अमेरिका परमाणु समझौता उनके कार्यकाल का एक ऐतिहासिक निर्णय था, जिसने भारत को वैश्विक परमाणु मंच पर एक जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। इसके अलावा उन्होंने पड़ोसी देशों और वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित और सम्मानजनक संबंधों पर जोर दिया।


राहुल गांधी की श्रद्धांजलि


पहली पुण्यतिथि पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने डॉ. मनमोहन सिंह को याद करते हुए कहा कि वे उनके लिए एक मार्गदर्शक और प्रेरणास्रोत रहे। राहुल गांधी ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का जीवन यह सिखाता है कि ईमानदारी, ज्ञान और धैर्य से भी देश की सेवा की जा सकती है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए भी उन्हें नमन किया और उनके योगदान को अमूल्य बताया।


देशभर में श्रद्धांजलि


डॉ. मनमोहन सिंह की पहली पुण्यतिथि पर कांग्रेस सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, बुद्धिजीवियों और आम नागरिकों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। सोशल मीडिया पर भी उन्हें याद करते हुए लोग उनके योगदान और सादगी की मिसालें साझा करते नजर आए।


एक विरासत जो हमेशा जीवित रहेगी


डॉ. मनमोहन सिंह भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी नीतियां, विचार और योगदान हमेशा देश का मार्गदर्शन करते रहेंगे। वे ऐसे प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने विवादों से दूर रहकर काम किया और अपने कर्मों से इतिहास रचा।


उनकी पहली पुण्यतिथि पर पूरा देश उन्हें नमन करता है और यह विश्वास जताता है कि उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा बना रहेगा।


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