छिंदवाड़ा: पहली डिलीवरी में महिला ने एक साथ चार बच्चों को दिया जन्म, सिविल अस्पताल में दुर्लभ मामला
- Lucky Kumar
- Dec 23, 2025
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मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से एक बेहद दुर्लभ और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। जिले की बरेलीपार निवासी 20 वर्षीय कून्नोबाई ने सिविल अस्पताल में एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया है। खास बात यह है कि यह प्रसूता की पहली डिलीवरी थी और डिलीवरी नॉर्मल तरीके से कराई गई, जिसे मेडिकल जगत में बेहद असामान्य माना जा रहा है।
एक लड़का और तीन लड़कियों का जन्म
अस्पताल सूत्रों के अनुसार, कून्नोबाई ने जिन चार बच्चों को जन्म दिया है, उनमें एक लड़का और तीन लड़कियां शामिल हैं। चारों नवजातों का जन्म सातवें महीने में हुआ है, जिस कारण उनका वजन सामान्य से काफी कम है। तीनों बच्चियों में से दो का वजन 600-600 ग्राम बताया जा रहा है, जबकि तीसरी बच्ची का वजन लगभग 550 ग्राम है। वहीं नवजात लड़के का वजन सबसे कम है, जो मात्र 400 ग्राम है।
बच्चों की हालत नाजुक, विशेष निगरानी में इलाज
जन्म के बाद से ही चारों बच्चों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। सभी नवजातों को सिविल अस्पताल के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU/NICU) में रखा गया है, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। डॉक्टरों के मुताबिक, समय से पहले जन्म और बेहद कम वजन होने के कारण बच्चों को संक्रमण और सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा अधिक रहता है।
पहली डिलीवरी में चार बच्चों का जन्म बेहद दुर्लभ
चिकित्सकों का कहना है कि किसी महिला की पहली डिलीवरी में एक साथ चार बच्चों का जन्म होना अत्यंत दुर्लभ मामलों में गिना जाता है। आमतौर पर मल्टीपल प्रेग्नेंसी में जटिलताओं का खतरा अधिक होता है, लेकिन इसके बावजूद कून्नोबाई की डिलीवरी नॉर्मल होना मेडिकल दृष्टि से एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
मां की हालत स्थिर
डिलीवरी के बाद मां कून्नोबाई की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। डॉक्टरों की देखरेख में उन्हें पोस्ट-डिलीवरी वार्ड में रखा गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मां और बच्चों दोनों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और जरूरत पड़ने पर उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
इलाके में चर्चा का विषय बना मामला
एक साथ चार बच्चों के जन्म की खबर फैलते ही अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में लोगों की भीड़ जुटने लगी। यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे ईश्वर का चमत्कार मान रहे हैं, वहीं डॉक्टर इसे मेडिकल साइंस का दुर्लभ उदाहरण बता रहे हैं।
प्रशासन भी सतर्क
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी सिविल अस्पताल पहुंचे और बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने डॉक्टरों को निर्देश दिए हैं कि नवजातों के इलाज में किसी भी तरह की लापरवाही न बरती जाए।
छिंदवाड़ा जिले में सामने आया यह मामला न सिर्फ चिकित्सा जगत के लिए चुनौती है, बल्कि यह दिखाता है कि समय पर सही इलाज और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मौजूदगी से असाधारण परिस्थितियों में भी उम्मीद की किरण बनी रहती है।




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