ग्लोबल एयर क्वालिटी रैंकिंग पर केंद्र सरकार का बड़ा बयान, कहा—ये आधिकारिक नहीं, WHO गाइडलाइंस भी केवल सलाह
- Lucky Kumar
- Dec 13, 2025
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केंद्र सरकार ने गुरुवार को संसद में वायु प्रदूषण और वैश्विक एयर क्वालिटी रैंकिंग को लेकर एक अहम और स्पष्ट बयान दिया। सरकार ने कहा कि दुनिया भर में विभिन्न संगठनों द्वारा जारी की जाने वाली ग्लोबल एयर क्वालिटी रैंकिंग किसी भी तरह की आधिकारिक रैंकिंग नहीं है और न ही इसे किसी अंतरराष्ट्रीय संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त है। सरकार के इस बयान के बाद वायु गुणवत्ता से जुड़ी वैश्विक रिपोर्ट्स और उनके आधार पर भारत की स्थिति को लेकर चल रही बहस को नया संदर्भ मिला है।
सरकार ने संसद को बताया कि अलग-अलग संगठन अपनी-अपनी पद्धतियों, सीमित डेटा स्रोतों और विश्लेषण के तरीकों के आधार पर ये रैंकिंग जारी करते हैं। ऐसे में इन रिपोर्ट्स को अंतिम या निर्णायक मानना सही नहीं है। सरकार के मुताबिक, कई बार इन रैंकिंग्स में उपयोग किया गया डेटा भारत के व्यापक और विविध भौगोलिक क्षेत्रों की वास्तविक स्थिति को पूरी तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता।
WHO के दिशा-निर्देशों पर भी सरकार की स्पष्टता
केंद्र सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा जारी किए जाने वाले वायु गुणवत्ता दिशा-निर्देश कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं हैं, बल्कि वे केवल एडवाइजरी वैल्यू, यानी एक सलाह के रूप में कार्य करते हैं। सरकार ने कहा कि WHO गाइडलाइंस का उद्देश्य देशों को स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर दिशा दिखाना है, लेकिन हर देश की परिस्थितियाँ, विकास स्तर, भौगोलिक स्थिति और सामाजिक-आर्थिक चुनौतियाँ अलग-अलग होती हैं।
सरकार का कहना है कि किसी भी देश के लिए वायु गुणवत्ता मानकों को तय करते समय उसके स्थानीय हालात, औद्योगिक गतिविधियाँ, जनसंख्या घनत्व, परिवहन व्यवस्था और जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखना जरूरी होता है। इसलिए WHO के दिशा-निर्देशों को ज्यों का त्यों अपनाना व्यवहारिक नहीं हो सकता।
भारत अपने मानक तय करने के लिए स्वतंत्र
संसद में सरकार ने यह भी कहा कि भारत अपने वायु गुणवत्ता मानकों को अपने संदर्भ (Context) के अनुसार तय करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है। देश में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और पर्यावरण मंत्रालय द्वारा निर्धारित राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता मानक वैज्ञानिक अध्ययन और घरेलू जरूरतों के आधार पर बनाए जाते हैं।
सरकार ने जोर देकर कहा कि भारत में वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए एक विस्तृत नेटवर्क मौजूद है, जिसमें सैकड़ों मॉनिटरिंग स्टेशन शामिल हैं। इनसे प्राप्त डेटा के आधार पर नीतियाँ बनाई जाती हैं और प्रदूषण कम करने के लिए विभिन्न योजनाएँ लागू की जाती हैं।
प्रदूषण नियंत्रण के लिए उठाए गए कदम
सरकार ने संसद में यह भी जानकारी दी कि देश में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP), वाहनों के लिए BS-VI मानकों को लागू करना, औद्योगिक उत्सर्जन पर नियंत्रण, पराली जलाने की समस्या से निपटने के लिए राज्यों के साथ समन्वय, और नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देना शामिल है।
सरकार का दावा है कि इन उपायों के चलते कई शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार भी देखने को मिला है। साथ ही, आने वाले समय में प्रदूषण नियंत्रण के लिए और सख्त कदम उठाने की योजना है।
ग्लोबल रिपोर्ट्स बनाम स्थानीय हकीकत
सरकार के इस बयान को ग्लोबल रिपोर्ट्स और स्थानीय वास्तविकताओं के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का कहना है कि वैश्विक रिपोर्ट्स को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता, लेकिन उन्हें बिना संदर्भ समझे अंतिम सच मान लेना भी उचित नहीं है। नीति निर्माण में प्राथमिकता देश के नागरिकों के स्वास्थ्य, आर्थिक विकास और सामाजिक जरूरतों को संतुलित करने की होनी चाहिए।
संसद में सरकार का यह बयान वायु गुणवत्ता को लेकर भारत के दृष्टिकोण को स्पष्ट करता है। सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि भारत वैश्विक सुझावों को ध्यान में रखते हुए, लेकिन अपनी परिस्थितियों के अनुसार स्वतंत्र रूप से नीतियाँ और मानक तय करेगा, ताकि पर्यावरण संरक्षण और विकास दोनों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।




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