उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया: 2.89 करोड़ नाम कटे, फाइनल ड्राफ्ट 31 दिसंबर को
- Lucky Kumar
- Dec 27, 2025
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सर्विलांस इन्फॉर्मेशन रिव्यू (SIR) प्रक्रिया के तहत 2.89 करोड़ लोगों के नाम कट गए हैं। यह जानकारी राज्य चुनाव आयोग द्वारा जारी रिपोर्ट में सामने आई है। पिछले 14 दिनों में केवल 2 लाख नए नाम इस प्रक्रिया में जुड़े हैं। अब अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि SIR प्रक्रिया में किसी भी तरह का समय विस्तार नहीं होगा, और 31 दिसंबर को फाइनल ड्राफ्ट जारी किया जाएगा।
लखनऊ और गाजियाबाद में सबसे अधिक नाम कटे
सूत्रों के अनुसार, सबसे ज्यादा नाम लखनऊ और गाजियाबाद जिलों से कटे हैं। इन दोनों जिलों से लगभग 30 प्रतिशत नाम इस प्रक्रिया में बाहर किए गए हैं। यह संकेत है कि शहरी और महानगरीय क्षेत्रों में पंजीकरण और दस्तावेज़ों में अनियमितता अधिक देखने को मिली है।
राज्य निर्वाचन अधिकारियों ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी जानकारी और दस्तावेज़ों की समीक्षा 26 दिसंबर की रात 12 बजे तक कर लें, ताकि किसी प्रकार की गलती या छूट न हो।
SIR प्रक्रिया का महत्व
SIR (Surveillance Information Review) प्रक्रिया का उद्देश्य है कि वोटर लिस्ट को अपडेट और पारदर्शी बनाया जाए। इसके तहत:
मृतक या स्थानांतरित वोटरों के नाम हटाए जाते हैं।
नए पात्र नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं।
पंजीकरण में त्रुटियों की पहचान और सुधार किया जाता है।
इस प्रक्रिया के फाइनल होने के बाद ही उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के लिए वोटर लिस्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा।
नाम कटने की वजह
राज्य चुनाव आयोग ने बताया कि नाम कटने के पीछे मुख्य कारण हैं:
गलत या अधूरा दस्तावेज़
एक से अधिक स्थान पर पंजीकरण
मृतक या निष्क्रिय वोटर की पहचान
स्थानीय पते का बदलाव
इस वजह से लाखों नागरिकों के नाम इस प्रक्रिया में बाहर किए गए हैं।
नागरिकों के लिए जरूरी सूचना
राज्य निर्वाचन अधिकारियों ने सभी नागरिकों से आग्रह किया है कि वे:
अपने नाम, पते और पहचान पत्र की जांच करें।
यदि कोई त्रुटि या गलत जानकारी हो, तो उसे SIR पोर्टल या नजदीकी निर्वाचन कार्यालय में तुरंत सुधारें।
समय सीमा 26 दिसंबर रात 12 बजे तक पूरी कर लें, क्योंकि उसके बाद कोई बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा।
फाइनल ड्राफ्ट और आगामी चुनाव
31 दिसंबर को फाइनल ड्राफ्ट जारी होने के बाद ही उत्तर प्रदेश की वोटर लिस्ट स्थायी रूप से अपडेट होगी। इससे सुनिश्चित होगा कि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और प्रभावी हो।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस बार बड़ी संख्या में नाम कटने के कारण कई शहरी क्षेत्रों में मतदाता आधार में बदलाव देखने को मिलेगा। यह आगामी चुनाव की रणनीति और उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकता है।




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