अरावली की सुरक्षा पर सियासत तेज: अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
- Lucky Kumar
- Dec 23, 2025
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राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने अरावली पर्वत श्रृंखला की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार अरावली को बचाने के बजाय उसे खनन माफिया के हवाले करने की योजना बना रही है। गहलोत के इस बयान के बाद पर्यावरण और राजनीति दोनों ही क्षेत्रों में नई बहस छिड़ गई है।
अरावली को लेकर केंद्र के इरादों पर सवाल
अशोक गहलोत ने कहा कि अरावली केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत के पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद अहम है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के हालिया फैसलों से यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण उसका असली उद्देश्य नहीं है।
गहलोत ने कहा,“केंद्र सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर अरावली और अन्य संरक्षित क्षेत्रों में खनन को बढ़ावा देना चाहती है। यह सिर्फ अरावली ही नहीं, बल्कि देश के प्राकृतिक संसाधनों के लिए भी खतरा है।”
बड़े फैसलों से जोड़ा मामला
पूर्व मुख्यमंत्री ने अरावली से जुड़े मुद्दे को केंद्र सरकार के दो अन्य बड़े फैसलों से जोड़ते हुए कहा कि इन सभी का मकसद एक ही है — पर्यावरणीय नियमों को कमजोर करना और खनन गतिविधियों को आसान बनाना। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो इसके दूरगामी और गंभीर परिणाम होंगे।
पर्यावरण पर पड़ने वाले असर की चेतावनी
अशोक गहलोत ने कहा कि अरावली पर्वत श्रृंखला दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात तक फैली हुई है और यह क्षेत्र रेगिस्तान के फैलाव को रोकने, भूजल संरक्षण और जलवायु संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि यहां अनियंत्रित खनन से जल संकट, प्रदूषण और तापमान में वृद्धि जैसी समस्याएं और गंभीर होंगी।
केंद्र सरकार पर संस्थाओं को कमजोर करने का आरोप
गहलोत ने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार पर्यावरण से जुड़ी संस्थाओं की स्वायत्तता को कमजोर कर रही है, ताकि फैसले अपने पक्ष में लिए जा सकें। उनका कहना है कि यह नीति दीर्घकालिक पर्यावरणीय नुकसान पहुंचाएगी, जिसकी भरपाई आने वाली पीढ़ियों को करनी पड़ेगी।
सियासी प्रतिक्रिया और आगे की रणनीति
गहलोत के इन आरोपों के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार से अरावली की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की है। वहीं भाजपा की ओर से इन आरोपों को राजनीतिक बताया जा रहा है।
अशोक गहलोत ने संकेत दिए कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा और पर्यावरण की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाया जाएगा।
अरावली की सुरक्षा को लेकर उठे इस विवाद ने एक बार फिर पर्यावरण बनाम विकास की बहस को सामने ला दिया है। अशोक गहलोत के आरोपों के बाद अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और क्या अरावली पर्वत श्रृंखला को वाकई सुरक्षित रखा जा सकेगा।




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