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अजब-गजब चुनाव: खाली थी एक सीट, मतदान हो गया दूसरी जगह, जीत के बाद खुली प्रशासन की नींद

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 27, 2025
  • 2 min read


खरगोन (मध्य प्रदेश)। मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां प्रशासनिक लापरवाही के चलते उपचुनाव पूरी तरह गलत वार्ड में करा दिया गया। जनपद पंचायत महेश्वर में जिस वार्ड में सीट खाली थी, वहां चुनाव कराने के बजाय अधिकारियों ने दूसरे वार्ड में ही पूरी चुनावी प्रक्रिया पूरी कर दी। हैरानी की बात यह रही कि एक उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित भी हो गया, लेकिन इसके बाद जाकर प्रशासन को अपनी गलती का अहसास हुआ।


कहां खाली थी सीट और कहां हो गया चुनाव?


जानकारी के अनुसार, जनपद पंचायत महेश्वर में वार्ड क्रमांक 7 की सीट खाली थी, जिसके लिए उपचुनाव कराया जाना था। लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भारी चूक के चलते वार्ड क्रमांक 9 में उपचुनाव की पूरी प्रक्रिया करवा दी गई।


नामांकन से लेकर जांच, आपत्तियां और चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद एक उम्मीदवार को निर्विरोध विजेता घोषित कर दिया गया।


जीत के बाद खुली प्रशासन की नींद


जब चुनाव की पूरी प्रक्रिया संपन्न हो गई और विजेता की घोषणा हो गई, उसके बाद प्रशासन को यह अहसास हुआ कि चुनाव गलत वार्ड में करा दिया गया है। मामला सामने आते ही हड़कंप मच गया और आनन-फानन में चुनाव को निरस्त करने का निर्णय लिया गया।


दो कर्मचारी सस्पेंड, चुनाव रद्द


इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए जिला प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों ने इसे मानवीय भूल बताते हुए कहा कि प्रारंभिक जांच में संबंधित कर्मचारियों की भूमिका स्पष्ट हुई है।

प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि चुनावी प्रक्रिया में हुई इस गलती को गंभीरता से लिया गया है और भविष्य में ऐसी चूक न हो, इसके लिए सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।


दोबारा शुरू होगी चुनाव प्रक्रिया


चुनाव निरस्त होने के बाद अब वार्ड क्रमांक 7 के लिए उपचुनाव की नई प्रक्रिया शुरू की जा रही है। निर्वाचन अधिकारियों ने कहा है कि इस बार सभी दस्तावेजों और सूचनाओं की दोबारा जांच की जाएगी, ताकि किसी तरह की गलती न हो।


लोकतंत्र पर उठे सवाल


इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर चुनाव व्यवस्था और प्रशासनिक दक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में ऐसी बड़ी गलती लोकतांत्रिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर डालती है।


स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि यह सिर्फ लापरवाही थी या सिस्टम में गहरी खामियां मौजूद हैं।


विशेषज्ञों की राय


प्रशासनिक विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में कई स्तरों पर सत्यापन होता है। ऐसे में गलत वार्ड में चुनाव हो जाना एक गंभीर सिस्टम फेलियर की ओर इशारा करता है। उनका मानना है कि जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।


खरगोन का यह मामला एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि चुनाव जैसी अहम प्रक्रिया में जिम्मेदारी और सतर्कता कितनी जरूरी है। फिलहाल प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है और चुनाव दोबारा कराने का निर्णय लिया गया है, लेकिन यह घटना लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहेगी।


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