2001 में पुतिन ने बुश से कहा था– पाकिस्तान में लोकतंत्र नहीं, परमाणु हथियार हैं दुनिया के लिए खतरा
- Lucky Kumar
- Dec 26, 2025
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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू. बुश के बीच वर्ष 2001 में हुई एक गोपनीय बातचीत अब सार्वजनिक हुई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है। इस बातचीत में पुतिन ने पाकिस्तान को लेकर बेहद तीखी टिप्पणी की थी और उसे “बिना लोकतंत्र वाला परमाणु संपन्न देश” बताया था।
यह ऐतिहासिक मुलाकात 16 जून 2001 को स्लोवेनिया में हुई थी। उस समय दुनिया शीत युद्ध के बाद के नए वैश्विक संतुलन की ओर बढ़ रही थी और अमेरिका व रूस के रिश्ते नई दिशा लेने की कोशिश कर रहे थे। इसी बैठक के दौरान पुतिन ने पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और उसके परमाणु हथियारों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी।
“पाकिस्तान में लोकतंत्र नहीं है” – पुतिन
सीक्रेट बातचीत के दौरान व्लादिमीर पुतिन ने जॉर्ज बुश से साफ शब्दों में कहा था कि पाकिस्तान में कोई वास्तविक लोकतंत्र मौजूद नहीं है। उन्होंने कहा था कि वहां की सत्ता सैन्य अधिकारियों के हाथ में है और इसके बावजूद वह देश परमाणु हथियारों से लैस है, जो पूरी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
पुतिन ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के पास मौजूद परमाणु हथियारों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को गंभीरता से सोचना चाहिए। उनका मानना था कि जिस देश में लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत न हों, वहां ऐसे हथियारों का होना वैश्विक सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा करता है।
पश्चिमी देशों पर भी उठाए सवाल
पुतिन ने बातचीत के दौरान पश्चिमी देशों की नीतियों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की आलोचना पश्चिमी देश खुलकर नहीं करते, जबकि लोकतंत्र की कमी और सैन्य शासन के बावजूद उसे लगातार समर्थन मिलता रहा है। पुतिन के अनुसार, यह दोहरा मापदंड अंतरराष्ट्रीय राजनीति की सच्चाई को उजागर करता है।
2001 का वैश्विक परिदृश्य
यह बातचीत ऐसे समय में हुई थी जब पाकिस्तान में जनरल परवेज़ मुशर्रफ का सैन्य शासन था। 9/11 की घटना से कुछ ही महीने पहले दुनिया आतंकवाद, परमाणु प्रसार और दक्षिण एशिया की अस्थिरता को लेकर चिंतित थी। ऐसे में पुतिन की यह टिप्पणी उस दौर की कूटनीतिक सोच और सुरक्षा चिंताओं को साफ तौर पर दर्शाती है।
क्यों अहम है यह खुलासा?
अब इस बातचीत के सार्वजनिक होने से यह साफ हो गया है कि रूस लंबे समय से पाकिस्तान की राजनीतिक व्यवस्था और परमाणु नीति को लेकर सशंकित रहा है। यह खुलासा भारत-पाकिस्तान संबंधों, रूस-अमेरिका समीकरण और वैश्विक परमाणु सुरक्षा बहस को नए सिरे से चर्चा में ला सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को लेकर पर्दे के पीछे कैसी सोच रखी जाती रही है, भले ही सार्वजनिक तौर पर कूटनीतिक भाषा का इस्तेमाल किया गया हो।
व्लादिमीर पुतिन का यह पुराना लेकिन अब सामने आया बयान न केवल पाकिस्तान की राजनीतिक संरचना पर सवाल उठाता है, बल्कि वैश्विक शक्तियों की दोहरी नीति को भी उजागर करता है। परमाणु हथियारों से लैस देशों में लोकतंत्र और स्थिरता की अहमियत को लेकर यह बातचीत आज भी उतनी ही प्रासंगिक दिखाई देती है।




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