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श्रीगंगानगर में क्रिसमस-डे पर शिक्षा विभाग का अहम आदेश, बच्चों पर परंपरा थोपने पर रोक

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 24, 2025
  • 2 min read


राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में क्रिसमस-डे को लेकर शिक्षा विभाग द्वारा जारी एक आदेश चर्चा का विषय बन गया है। 25 दिसंबर को क्रिसमस के अवसर पर बच्चों को सांता क्लॉज बनाने या उससे जुड़ी गतिविधियों में भाग लेने के लिए मजबूर करने को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। यह आदेश जिले के सभी सरकारी और निजी विद्यालयों पर समान रूप से लागू होगा।


क्या है शिक्षा अधिकारी का आदेश


जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि श्रीगंगानगर जिला हिंदू और सिख बहुल क्षेत्र है। ऐसे में किसी भी प्रकार की धार्मिक या सांस्कृतिक परंपरा को बच्चों पर थोपना उचित नहीं है। आदेश के अनुसार:


  • किसी भी सरकारी या निजी विद्यालय में बच्चों को सांता क्लॉज बनाने के लिए दबाव नहीं डाला जाएगा

  • क्रिसमस-डे से जुड़ी गतिविधियां पूरी तरह स्वैच्छिक होंगी

  • किसी छात्र या अभिभावक पर किसी भी प्रकार का मानसिक या सामाजिक दबाव स्वीकार्य नहीं होगा


आदेश का उद्देश्य


शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य सभी धर्मों और समुदायों की भावनाओं का सम्मान बनाए रखना है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों का दायित्व बच्चों को शिक्षा देना है, न कि किसी विशेष संस्कृति या परंपरा को अनिवार्य रूप से अपनाने के लिए मजबूर करना।


उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी


शिक्षा अधिकारी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि किसी भी स्कूल में इस आदेश का उल्लंघन किया गया और बच्चों को सांता क्लॉज या अन्य गतिविधियों के लिए मजबूर किया गया, तो संबंधित विद्यालय के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इसमें:


  • नोटिस जारी करना

  • मान्यता संबंधी कार्रवाई

  • अन्य अनुशासनात्मक कदम

शामिल हो सकते हैं।


शिक्षा बनाम परंपरा की बहस


यह आदेश एक बार फिर शिक्षा संस्थानों में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों की सीमा को लेकर बहस को जन्म दे रहा है। कुछ लोगों का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रम बच्चों को सांस्कृतिक विविधता सिखाते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह व्यक्तिगत आस्था का विषय है और इसे स्कूलों में अनिवार्य नहीं बनाया जाना चाहिए।


अभिभावकों की प्रतिक्रिया


कई अभिभावकों ने इस आदेश का समर्थन करते हुए कहा है कि बच्चों को किसी भी धार्मिक गतिविधि में शामिल करने से पहले उनकी इच्छा और पारिवारिक पृष्ठभूमि का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं कुछ अभिभावकों का मानना है कि यदि गतिविधियां वैकल्पिक हों तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए।


श्रीगंगानगर जिले में शिक्षा विभाग का यह कदम संवैधानिक मूल्यों, धार्मिक स्वतंत्रता और सामाजिक संतुलन की दिशा में अहम माना जा रहा है। आदेश यह संदेश देता है कि शिक्षा का उद्देश्य समावेशिता और सम्मान है, न कि किसी परंपरा को अनिवार्य बनाना।


अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस आदेश के बाद जिले के स्कूल किस तरह से क्रिसमस-डे या अन्य सांस्कृतिक आयोजनों को लेकर आगे की रणनीति बनाते हैं।


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