राजस्थान के बाड़मेर जिले में IAS टीना डाबी को लेकर विवाद: छात्राओं के बयान से उठी बहस और प्रशासनिक चुनौती
- Sonu Yadav
- Dec 22, 2025
- 4 min read

घटना का विवरण
राजस्थान के बाड़मेर जिले में हाल ही में एक विवादित घटना ने तहलका मचा दिया है। यह घटना टीना डाबी, जो राजस्थान की चर्चित IAS अधिकारी हैं, को लेकर सामने आई। दरअसल, कुछ छात्राओं ने सार्वजनिक रूप से ऐसा बयान दिया कि जिले में सामाजिक और प्रशासनिक दोनों ही स्तरों पर माहौल तनावपूर्ण हो गया।
घटना तब शुरू हुई जब एबीवीपी से जुड़ी छात्राएं अपने कॉलेज के बाहर प्रदर्शन कर रही थीं। उनका मुख्य मुद्दा था कॉलेज की फीस में कटौती और शिक्षा क्षेत्र में छात्रों के हित में सुधार। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही मौके पर एडीएम और एसडीएम पहुंचे। प्रशासन का उद्देश्य था प्रदर्शन को शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराना और छात्रों की मांगों को समझना।
छात्राओं का विवादित बयान
मौके पर एसडीएम ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया और कहा कि टीना डाबी मैडम हमारे लिए रोल मॉडल हैं। लेकिन छात्राओं ने अप्रत्याशित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि,
"कलेक्टर मैडम हमारी रोल मॉडल नहीं हैं, वे तो रील स्टार हैं।"
इस बयान ने प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य छात्रों को हैरान कर दिया। छात्राओं का यह कहना था कि टीना डाबी का सोशल मीडिया और रील्स पर सक्रिय रहना उन्हें पारंपरिक रोल मॉडल के रूप में देखने की धारणा को प्रभावित करता है। उनके दृष्टिकोण में, रोल मॉडल वह होता है जो केवल प्रशासनिक या पेशेवर सफलता के लिए आदर्श हो, न कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और रील्स के लिए।
पुलिस और प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रदर्शन के कुछ समय बाद पुलिस ने दो छात्र नेताओं को हिरासत में लिया। अधिकारियों का कहना था कि हिरासत में लेना केवल शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए किया गया। प्रशासन ने साफ किया कि छात्रों की मांगों को सुना जाएगा, लेकिन कानून और व्यवस्था का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
एसडीएम ने बाद में कहा कि छात्राओं का बयान दुर्भाग्यपूर्ण था, लेकिन इसे राजनीतिक या सामाजिक रंग में नहीं देखा जाना चाहिए। प्रशासन का ध्यान मुख्य रूप से छात्रों की फीस और शिक्षा संबंधित मांगों पर है।
टीना डाबी: रोल मॉडल और IAS अधिकारी
टीना डाबी, जो UPSC परीक्षा में टॉप करने के बाद IAS बनीं, राजस्थान की युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत रही हैं। उन्होंने कठिन परिस्थितियों में संघर्ष किया और प्रशासनिक सुधारों में सक्रिय भूमिका निभाई।
टीना डाबी का सोशल मीडिया पर सक्रिय रहना—विशेष रूप से रील्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उनकी लोकप्रियता—कुछ युवाओं के लिए उनकी आदर्श छवि को प्रभावित कर सकता है। यह घटना इस बात की ओर इशारा करती है कि सोशल मीडिया और वास्तविक जीवन के रोल मॉडल की धारणा में युवा पीढ़ी में अंतर मौजूद है।
छात्राओं का दृष्टिकोण और सामाजिक पहलू
छात्राओं का कहना है कि सोशल मीडिया पर सक्रिय होना और रील्स बनाना केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक छवि को प्रभावित करता है। उनके अनुसार, रोल मॉडल केवल पेशेवर काबिलियत और प्रशासनिक उपलब्धियों के आधार पर होना चाहिए।
सामाजिक दृष्टिकोण से, यह घटना दिखाती है कि युवा पीढ़ी के बीच नेतृत्व, आदर्श और सोशल मीडिया प्रभाव को लेकर दृष्टिकोण में बदलाव आ रहा है। यह केवल व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक प्रवृत्ति का हिस्सा है।
शिक्षा क्षेत्र और फीस कम करने की मांग
प्रदर्शन का मूल मुद्दा था कॉलेज की फीस कम करने की मांग। राजस्थान के कई जिलों में छात्र संगठन फीस में कटौती, छात्रवृत्ति और शैक्षणिक सुधारों के लिए समय-समय पर प्रदर्शन करते रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि युवा वर्ग की ये मांगें जायज़ हैं, लेकिन विचार-विमर्श और शांति बनाए रखना बेहद आवश्यक है। विरोध प्रदर्शन का तरीका कभी-कभी प्रशासनिक अधिकारियों और छात्राओं के बीच टकराव पैदा कर सकता है।
सोशल मीडिया और रोल मॉडल का बदलता स्वरूप
टीना डाबी का सोशल मीडिया सक्रिय रहना—विशेषकर रील्स बनाना—इस बात को उजागर करता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म ने रोल मॉडल और सार्वजनिक छवि की धारणा बदल दी है। युवाओं के लिए ऑनलाइन कंटेंट, लोकप्रियता और पेशेवर उपलब्धि का मिश्रण अलग-अलग अर्थ रख सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल टीना डाबी का मामला नहीं है, बल्कि पूरे समाज में सोशल मीडिया और वास्तविक जीवन के रोल मॉडल की धारणा पर एक नया सवाल उठाता है।
प्रशासन और भविष्य की दिशा
बाड़मेर प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया। एसडीएम और पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित किया और छात्रों की मांगों को सुनने का आश्वासन दिया।
आने वाले दिनों में प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि शिक्षा सुधार, छात्रों की मांग और सामाजिक संवाद सही दिशा में जाए। इसके साथ ही, छात्र नेताओं को भी समझना होगा कि उनके बयान और प्रदर्शन सामाजिक और प्रशासनिक माहौल पर असर डालते हैं।
बाड़मेर की यह घटना दर्शाती है कि IAS अधिकारियों और युवा पीढ़ी के बीच संवाद की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। छात्राओं का बयान विवादास्पद था, लेकिन इसके पीछे शिक्षा सुधार और सोशल मीडिया प्रभाव जैसे गंभीर मुद्दे भी हैं।
टीना डाबी की छवि और उनका रोल मॉडल होना युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा है, लेकिन सोशल मीडिया के युग में इसकी व्याख्या अलग-अलग हो सकती है। प्रशासन और समाज को यह समझना होगा कि युवाओं को सही दिशा में मार्गदर्शन देने के साथ-साथ उनकी आवाज़ सुनना भी जरूरी है।
यह घटना भविष्य में छात्र-प्रशासन संवाद और सामाजिक चेतना के लिए एक महत्वपूर्ण सबक साबित हो सकती है।




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