“भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, वह एक संस्कार था” आज की आधुनिक जीवनशैली में शादियां और पार्टियां भले ही पहले से ज्यादा भव्य, चमक-दमक से भरपूर और सुविधाओं से सुसज्जित हो गई हों, लेकिन इन सबके बीच पवित्रता और संस्कार धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं । शराब के गिलास, दिखावे की थालियां और औपचारिक व्यवहार के बीच न आचरण की शुद्धता बची है, न विचारों की निर्मलता। इसी विषय पर वृंदावन-मथुरा के जाने-माने संत प्रेमानंद महाराज से एक भक्त ने प्रश्न किया कि— “हमें आज की शादियों और पार्टियों में