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भारत में टोल सिस्टम का नया युग: AI आधारित डिजिटल टोल व्यवस्था से बदलेगा हाईवे सफर

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 18, 2025
  • 3 min read


भारत में सड़क परिवहन व्यवस्था अब एक बड़े तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रही है। केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे पर यात्रा को तेज, आसान और बिना रुकावट बनाने के लिए AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित डिजिटल टोल सिस्टम लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के अनुसार, यह अत्याधुनिक टोल व्यवस्था 2026 के अंत तक देशभर के सभी नेशनल हाईवे पर लागू कर दी जाएगी।


क्या है AI आधारित डिजिटल टोल सिस्टम?


AI आधारित डिजिटल टोल सिस्टम एक ऐसी तकनीक है जिसमें वाहन को टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं होगी। इस सिस्टम में कैमरा, सेंसर, GPS और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से वाहन की पहचान की जाएगी और तय दूरी के हिसाब से ऑटोमैटिक टोल कटौती कर ली जाएगी।


सरल शब्दों में कहें तो अब टोल प्लाजा पर लाइन में लगने, रुकने या फास्टैग स्कैन कराने की जरूरत नहीं होगी। जैसे ही वाहन हाईवे पर एंट्री और एग्जिट करेगा, सिस्टम खुद ही दूरी मापेगा और उसी के अनुसार टोल चार्ज कर लेगा।


FASTag की जगह लेगा नया सिस्टम


वर्तमान में देशभर में FASTag के जरिए टोल वसूली की जाती है, लेकिन इसमें भी कई बार तकनीकी दिक्कतें, लंबी कतारें और विवाद देखने को मिलते हैं। AI आधारित डिजिटल टोल सिस्टम इन सभी समस्याओं का समाधान करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।


नितिन गडकरी के अनुसार, नई व्यवस्था में टोल प्लाजा की जरूरत ही खत्म हो सकती है। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि ईंधन की खपत और प्रदूषण में भी कमी आएगी।


कैसे होगा टोल चार्ज?


नई डिजिटल टोल व्यवस्था में पे-पर-डिस्टेंस मॉडल लागू किया जाएगा। यानी जितनी दूरी आप हाईवे पर तय करेंगे, उतना ही टोल देना होगा। अभी के सिस्टम में कई बार कम दूरी तय करने पर भी पूरा टोल देना पड़ता है, जिससे यात्रियों में नाराजगी रहती है।


AI सिस्टम वाहन की नंबर प्लेट या डिजिटल पहचान के जरिए उसकी मूवमेंट ट्रैक करेगा और तय अकाउंट से अपने आप टोल काट लेगा।


यात्रियों को क्या होंगे फायदे?


AI आधारित डिजिटल टोल सिस्टम से आम जनता को कई बड़े फायदे मिलने वाले हैं:

  • टोल प्लाजा पर रुकने की जरूरत नहीं

  • यात्रा समय में भारी कमी

  • ईंधन की बचत

  • ट्रैफिक जाम से राहत

  • पारदर्शी और सटीक टोल वसूली

  • कम दूरी पर कम टोल का भुगतान

इसके अलावा लॉजिस्टिक्स सेक्टर को भी इससे बड़ा फायदा होगा, क्योंकि ट्रकों और कमर्शियल वाहनों की आवाजाही तेज होगी।


सरकार की तैयारी और टाइमलाइन


केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने साफ किया है कि सरकार इस सिस्टम को फेज-वाइज तरीके से लागू करेगी। पहले इसे चुनिंदा हाईवे पर टेस्ट किया जाएगा और फिर धीरे-धीरे पूरे देश के नेशनल हाईवे नेटवर्क पर विस्तार किया जाएगा।


सरकार का लक्ष्य है कि 2026 के अंत तक देश के सभी प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग इस नई डिजिटल टोल व्यवस्था से जुड़ जाएं।


प्राइवेसी और डेटा सुरक्षा पर सवाल


जहां एक ओर यह सिस्टम तकनीकी रूप से बेहद उन्नत है, वहीं कुछ विशेषज्ञों ने डेटा प्राइवेसी और निगरानी को लेकर सवाल भी उठाए हैं। वाहन की मूवमेंट ट्रैक होने से डेटा सुरक्षा को लेकर सरकार को मजबूत नियम और सुरक्षा उपाय लागू करने होंगे।


सरकार का कहना है कि डेटा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी और सभी नियम कानूनों के तहत ही यह सिस्टम काम करेगा।


AI आधारित डिजिटल टोल सिस्टम भारत के सड़क परिवहन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने की क्षमता रखता है। यह न केवल यात्रियों के समय और पैसे की बचत करेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, लॉजिस्टिक्स और पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।


अगर यह योजना तय समय पर और सही तरीके से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत का हाईवे सफर पूरी तरह बदल सकता है।

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