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बिक गई पाकिस्तान की सरकारी एयरलाइन PIA, 135 अरब रुपये में हुआ सौदा, आर्थिक संकट की गहराती तस्वीर

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 24, 2025
  • 2 min read


पाकिस्तान की खराब आर्थिक हालत एक बार फिर दुनिया के सामने आ गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और मित्र देशों से लगातार आर्थिक मदद मिलने के बावजूद पाकिस्तान संकट से बाहर नहीं निकल पा रहा है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि शहबाज़ शरीफ सरकार को देश की सरकारी एयरलाइन पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस (PIA) तक बेचनी पड़ी है।


मंगलवार को पाकिस्तान सरकार ने नेशनल फ्लैग कैरियर PIA के निजीकरण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। इस डील के तहत PIA को 135 अरब रुपये में एक स्थानीय निवेश कंपनी के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बेच दिया गया है।


कैसे हुआ PIA का निजीकरण


पाकिस्तान सरकार लंबे समय से PIA के निजीकरण की कोशिश कर रही थी। भारी घाटे, बढ़ते कर्ज और खराब मैनेजमेंट के चलते PIA सरकार के लिए लगातार बोझ बनती जा रही थी।


आखिरकार सरकार ने फैसला लिया कि एयरलाइन को निजी हाथों में सौंपना ही एकमात्र रास्ता है। इसके बाद नेशनल फ्लैग-कैरियर के लिए प्राइवेटाइजेशन प्रोसेस शुरू किया गया, जिसे अब औपचारिक रूप से पूरा कर लिया गया है।


किसने खरीदी PIA


सरकारी बयान के अनुसार, PIA को लोकल इन्वेस्टमेंट कंपनी के नेतृत्व वाले एक कंसोर्टियम ने खरीदा है। हालांकि सौदे की पूरी शर्तें और निवेशकों के नाम सार्वजनिक रूप से सीमित तौर पर ही सामने आए हैं, लेकिन यह साफ है कि अब PIA सरकार के नियंत्रण से बाहर हो चुकी है।


घाटे में डूबी एयरलाइन


PIA बीते कई वर्षों से लगातार घाटे में चल रही थी। एयरलाइन पर:


  • हजारों करोड़ रुपये का कर्ज

  • कर्मचारियों की अधिक संख्या

  • विमानों की कमी

  • अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर प्रतिबंध


जैसी गंभीर समस्याएं थीं। यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों ने सुरक्षा मानकों को लेकर PIA की उड़ानों पर रोक भी लगाई थी, जिससे कंपनी की हालत और खराब हो गई।


पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की सच्चाई


PIA की बिक्री पाकिस्तान की डांवाडोल अर्थव्यवस्था की एक और मिसाल बन गई है। महंगाई रिकॉर्ड स्तर पर है, विदेशी मुद्रा भंडार बेहद कम है और सरकार को रोजमर्रा के खर्चों के लिए भी कर्ज पर निर्भर रहना पड़ रहा है।


IMF से मिले राहत पैकेज और सऊदी अरब, चीन जैसे देशों की मदद के बावजूद पाकिस्तान आर्थिक स्थिरता हासिल नहीं कर पा रहा है।


सरकार का क्या कहना है


पाकिस्तान सरकार का दावा है कि PIA के निजीकरण से:


  • सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा

  • एयरलाइन की कार्यक्षमता सुधरेगी

  • नई नौकरियां और निवेश आएगा


हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह फैसला सरकार की विफल आर्थिक नीतियों का नतीजा है और भविष्य में और सरकारी संस्थानों की बिक्री का रास्ता खोल सकता है।


राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया


PIA की बिक्री को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार पर राष्ट्रीय संपत्तियां बेचने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार इसे मजबूरी में उठाया गया कदम बता रही है।

कर्मचारी यूनियनों ने भी निजीकरण को लेकर चिंता जताई है और नौकरियों पर खतरे की आशंका जाहिर की है।


पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस की बिक्री न सिर्फ एक व्यावसायिक सौदा है, बल्कि यह पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली का बड़ा संकेत भी है। जिस एयरलाइन को कभी देश की शान माना जाता था, आज उसे आर्थिक संकट के चलते बेचना पड़ा।


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