‘धुरंधर’ मूवी ने फिर हरा की कांधार हाईजैक की 25 साल पुरानी चोट, क्या भारत ने उस आतंकवादी के चैलेंज का जवाब दिया?
- Lucky Kumar
- Dec 24, 2025
- 3 min read

फिल्म ‘धुरंधर’ सिर्फ एक सिनेमाई कहानी नहीं है, बल्कि यह भारत के इतिहास के उस काले अध्याय को फिर से खोल देती है, जिसने हर भारतीय के दिल पर गहरी चोट छोड़ी थी। 25 साल पहले हुए कांधार विमान अपहरण की यादें आज भी देश के ज़ेहन में ताज़ा हैं और इस फिल्म ने उन्हीं जख्मों को एक बार फिर हरा कर दिया है।
शुरुआती संवाद जिसने खून खौला दिया
फिल्म की शुरुआत में ही एक ऐसा संवाद आता है, जो दर्शकों को झकझोर देता है। एक हाईजैकर भारतीय खुफिया अधिकारी से कहता है—“पड़ोस में रहते हैं हम… पूरा जोर लगा लो… और बिगाड़ लो जो बिगाड़ सकते हो।”
यह संवाद सिर्फ एक अधिकारी को नहीं, बल्कि पूरे भारत देश को खुली चुनौती देता है। थिएटर में बैठे हर भारतीय के भीतर गुस्सा, दर्द और बेबसी का सैलाब उमड़ पड़ता है। यह वही मानसिकता है, जो दशकों से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के जरिए भारत को चुनौती देती रही है।
कांधार हाईजैक: भारत के आत्मसम्मान पर हमला
1999 में हुआ कांधार विमान अपहरण सिर्फ यात्रियों की जान का संकट नहीं था, बल्कि यह भारत की संप्रभुता, सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक मजबूरी की परीक्षा थी। आतंकियों की मांगों के आगे झुकना उस समय भारत के लिए एक कठिन लेकिन मजबूर फैसला था।
फिल्म ‘धुरंधर’ उस दौर की राजनीतिक दबाव, कूटनीतिक विवशता और खुफिया तंत्र की सीमाओं को बेहद प्रभावी ढंग से सामने रखती है।
पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद की खुली स्वीकारोक्ति
फिल्म में दिखाया गया हाईजैकर कोई छिपा हुआ किरदार नहीं है। वह खुलेआम जिस तरह भारत को चुनौती देता है, वह पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद की सबसे मुखर अभिव्यक्ति है।यह दृश्य यह साफ कर देता है कि आतंकवाद सिर्फ बंदूक से नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक युद्ध के जरिए भी लड़ा जाता है।
क्या भारत ने उस चैलेंज का जवाब दिया?
फिल्म देखने के बाद हर भारतीय के मन में यही सवाल उठता है—क्या भारत ने उस आतंकवादी के चैलेंज का जवाब दिया?
इस सवाल का जवाब वक्त के साथ बदलता नजर आता है। कांधार के समय भारत कूटनीतिक और सैन्य रूप से सीमित विकल्पों में था, लेकिन बीते 25 वर्षों में भारत की रणनीति पूरी तरह बदल चुकी है।
उरी सर्जिकल स्ट्राइक
बालाकोट एयर स्ट्राइक
आतंकियों के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करना
ये सभी कदम इस बात का संकेत हैं कि भारत अब चुप रहने वाला देश नहीं है।
‘धुरंधर’ सिर्फ फिल्म नहीं, चेतावनी है
‘धुरंधर’ एक थ्रिलर से कहीं ज्यादा है। यह फिल्म भारत को यह याद दिलाती है कि कमज़ोरी की कीमत क्या होती है, और ताकतवर बनने का रास्ता कितना जरूरी है। यह नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई दिखाती है, जिसे किताबों या खबरों में पूरी तरह महसूस नहीं किया जा सकता।
दर्शकों पर गहरा प्रभाव
फिल्म रिलीज़ के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं बता रही हैं कि यह फिल्म लोगों के दिल को छू रही है। कई दर्शकों का कहना है कि कुछ दृश्य इतने भावुक और गुस्से से भरे हैं कि आंखें नम हो जाती हैं और मुट्ठियां खुद-ब-खुद भिंच जाती हैं।
‘धुरंधर’ कांधार हाईजैक की कहानी के जरिए यह सवाल छोड़ जाती है कि क्या हम इतिहास से सबक ले चुके हैं?आज का भारत पहले से कहीं ज्यादा मजबूत, आत्मनिर्भर और निर्णायक है। शायद यही उस आतंकवादी के चैलेंज का सबसे बड़ा जवाब है—अब भारत सिर्फ सहता नहीं, जवाब देता है।




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