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कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने यादव समाज से मांगी माफी, वायरल वीडियो ने बढ़ाई विवाद की आग

  • Writer: Lucky Kumar
    Lucky Kumar
  • Dec 26, 2025
  • 2 min read


कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर यादव समाज से माफी मांगी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका इरादा किसी को अपमानित करना या कष्ट पहुँचाना नहीं था। यह माफी उस वीडियो के वायरल होने के बाद आई, जो करीब 5 साल पुराना है और सोशल मीडिया पर तेजी से साझा किया जा रहा है।


वायरल वीडियो और विवाद


वायरल वीडियो में इंद्रेश उपाध्याय कथावाचन के दौरान यादव वंश को लेकर कुछ टिप्पणियां करते नजर आए। उनकी कुछ बातें यादव समाज के सदस्यों को आपत्तिजनक लगीं। यादव समाज के लोगों का कहना है कि वे श्री कृष्ण के वंशज हैं और इस तरह की टिप्पणियों से उनका अपमान हुआ।


इंद्रेश उपाध्याय की माफी


वीडियो में इंद्रेश उपाध्याय ने कहा:


“हमारे समस्त यादव समाज, भाई-बंधुओं को बहुत-बहुत क्षमा प्रार्थी हूं। आप सब लोग एक विषय से बहुत आहत हो गए। हमारा उद्देश्य किसी को दुख पहुँचाना नहीं था। अगर मेरी बातें किसी को ठेस पहुंचाईं हैं, तो उसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूँ।”


उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका कथावाचन सिर्फ धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से था, किसी समुदाय या जाति को नीचा दिखाने के लिए नहीं।


सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं


सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं मिली-जुली हैं। कई लोग इंद्रेश उपाध्याय की माफी को सकारात्मक मान रहे हैं और इसे समझदारी और जिम्मेदारी का उदाहरण बता रहे हैं। वहीं, कुछ लोग अभी भी नाराजगी व्यक्त कर रहे हैं और मांग कर रहे हैं कि कथावाचक को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि उनका उद्देश्य अपमान नहीं था।


विशेषज्ञों की राय


सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो का वायरल होना आजकल आम बात हो गई है। कई बार पुराने संदर्भ में कही गई बातें नए संदर्भ में गलत समझी जा सकती हैं। ऐसे मामलों में माफी और स्पष्टिकरण देना सही कदम माना जाता है।


इंद्रेश उपाध्याय की माफी ने विवाद को कुछ हद तक शांत किया है, लेकिन यह घटना यह भी दिखाती है कि सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता का ध्यान रखना कितना जरूरी है। कथावाचक ने अपनी माफी और स्पष्टिकरण के माध्यम से संदेश दिया कि उनका उद्देश्य किसी का अपमान नहीं था।


इस पूरे मामले ने यह भी उजागर किया कि सोशल मीडिया पर पुराने कंटेंट का वायरल होना किस प्रकार से सार्वजनिक धारणा को प्रभावित कर सकता है और लोगों की भावनाओं पर असर डाल सकता है।

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